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Chhath Puja: क्या है छठ पर्व का महत्व? छठ में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे की असली कहानी; नहीं जानते होंगे आप

Chhath Puja 2025: छठ पूजा में उगते और डूबते दोनों सूरज को जल चढ़ाना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. तभी व्रत को पूरा और समपन्न माना जाता है. आइए जानते हैं आखिर क्यों दिया चढ़ाया जाता है अर्घ्य?

Published by Preeti Rajput

Chhath Puja 2025 Significance: छठ पूजा (Chhath Puja 2025) भारत का एक अनूठा महापर्व है. यह त्योहार पूरी तरह से प्रकृति और सूर्य देव को समर्पित है. इस त्योहार में सूर्य के उदय से लेकर अस्त का महत्व है. इसी कारण इस व्रत में उगसे सूर्य के अर्घ्य दिया जाता है. लेकिन उससे पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर जल चढ़ाया जाता है. यह पूजा पूरे विधि-विधान और पारंपरिक तरीके से की जाती है. इस साल यह त्योहार 25 अक्टूबर को से शुरु होगा. इस दिन नहाए-खाए से व्रत की शुरुआत होगी. इस व्रत का समापन 28 अक्टूबर को उगते सूर्य के अर्घ्य देने के बाद होगा. यह पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है. इस पर्व का महत्व पूर्वी उत्तर-प्रदेश और बिहार में सबसे अधिक है. 

डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व (Offering Arghya to the setting Sun)

छठ पूजा की शुरुआत शाम के अर्घ्य से होती है. इसमें डूबते हुए सूर्य को जल चढ़ाया जाता है. बता दें कि किसी और त्योहार या व्रत में डूबते सूर्य की पूजा नहीं की जाती है. इसके पीछे काफी ज्यादा गहरा महत्व है. 

बीते हुए अतीत का सम्मान

डूबता हुआ सूर्य हमारे बीते हुए कल का प्रतीक होता है. जिसने हमें जिंदगी जीने का अनुभव दिया है. यह इस बात का संदेश है कि हमें केवल वर्तमान में ही सफल व्यक्ति का नहीं बल्कि अतीत का भी सम्मान करना चाहिए. 

समानता

छठ अस्त को भी उदय जितना ही सम्मान मिलना चाहिए. घाट पर खड़े होकर डूबते सूर्य को प्रणाम करते हैं. यह समानता का ही एक प्रतीक है. 

पौराणिक मान्यता

पौराणित मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देवता की दो पत्नियां है. सुबह की पहली किरण ऊषा हैं और शाम की अंतिम किरण प्रत्यूषा है. जिस वक्त सूर्य ढल रहा होता है, वह अपनी दूसरी पत्नी के साथ होते हैं. इसी कारण डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर प्रत्यूषा देवी की उपासना की जाती है. इनकी पूजा से जीवन में समृद्धि और संपन्नता आती है.

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उगते सूर्य को अर्घ्य (Offering Arghya to rising sun)

व्रत का समापन उगते हुए सूर्य (उषाकाल) को अर्घ्य देकर ही किया जाता है. इसे ऊषा अर्घ्य भी कहकर पुकारते हैं. यह जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक होता है. 

वर्तमान और भविष्य

उगता सूरज आज और अच्छे भविष्य की तरफ संकेत देता है. जिस तरह सूरज हर रोज एक नई शक्ति के साथ उगता है. उसी तरह जीवन हमारा जीवन भी रोशनी से भरा रहे. यह अर्घ्य उसी बात का प्रतीक है. 

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सकारात्मक ऊर्जा 

उगते सूर्य की किरणें शुद्धता का प्रतीक मानी जाती हैं. इस समय अर्घ्य देने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

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