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Aja Ekadashi 2025 : गलती से कहीं एकादशी के दिन कर न देना ये गलतियां, नहीं तो पड़ सकता है भारी…व्रत रखने से पहले ही जान लें ये नियम

Aja Ekadashi 2025 : हिंदू धर्म में एकादशी का काफी ज्यादा महत्व है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को व्रत के साथ-साथ भगवान विष्णु की उपासना करना बेहद शुभ माना जाता है। इस व्रत को करने से कई लाभ के साथ-साथ पिछले जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है।

Published by Preeti Rajput

Aja Ekadashi 2025 : भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का हिंदू धर्म में काफी ज्यादा महत्व है। इस एकादशी को अजा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन लोग अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए व्रत रखते हैं। इस दिन व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत 19 अगस्त को बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। 

इस व्रत के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। अगर इस व्रत को रखने में कोई गलती हो जाए, तो इसका फल उलटा पड़ सकता है। 

इस दिन क्या ना करें?

  • चावल न खाएं- इस दिन चावल खाना वर्जित माना जाता है। इस दिन अगर आप भूल से भी इसका सेवन कर लेते हैं तो व्रत खंडित हो जाता है।
  • तामसिक भोजन से बचें- इस दिन केवल सात्विक भोजन ही करना चाहिए। इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, और अन्य तामसिक चीजों ले दूर रहना चाहिए। तभी आपका व्रत पूरा माना जाता है।
  • दूसरों की बुराई भूलकर भी ना करें- इस दिन खाने-पीने के अलावा मन को भी शुद्ध रखना चाहिए। इस दिन दूसरे को बुराई या किसी को भला-बुरा कहने से बचना चाहिए। अपने मन को पवित्र रखें और जितना हो सके उतना क्रोध से बचें।
  • बाल और नाखून- इस दिन भूलकर भी बाल और नाखुन ना काटें। ऐसा करने से व्रत का फल नहीं मिलता है। साथ ही व्रत उलटा पड़ जाता है।
  • तुलसी को ना छुए- भगवान विष्णु को तुलसी काफी ज्यादा प्रिय है। इस दिन तुलसी का पौधा नहीं छूना चाहिए। इस दिन तुलसी माता भी निर्जला व्रत रखती हैं। इसी कारण तुलसी को छूने और पत्तीयां तोड़ने की मनाही होती है।
  • व्रत के दिन ना सोएं-  दिन में सोना अशुभ माना जाता है। इससे व्रत सफल नहीं होता है। इस दिन पूजा-पाठ में ध्यान लगाना चाहिए।

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इस दिन क्या करें?

इस दिन, भक्त सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र स्नान करते हैं। घर को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद, वे पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करते हैं। पीले फूल, तुलसी के पत्ते, फल और धूप अर्पित की जाती है। भक्त पूरे दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करते हैं और शाम को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान-दक्षिणा देने के बाद व्रत तोड़ा जाता है। 

Disclaimer: इस आलेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है। पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इन खबर इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है। 

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