Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण एक बार फिर दुनिया की नजरें Strait of Hormuz पर टिक गई हैं. हाल के घटनाक्रमों में ईरान की ओर से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर शिपिंग को सीमित करने की चेतावनी ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ा दी है. अगर इस रास्ते पर आवाजाही बाधित होती है तो तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए ये मुद्दा और भी संवेदनशील है. भारत को हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से मिलता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों पर असर डाल सकता है. इसी वजह से जब भी इस स्ट्रेट से जुड़ी कोई खबर सामने आती है, पूरी दुनिया का ध्यान तुरंत इस क्षेत्र की ओर चला जाता है.
होर्मुज स्ट्रेट क्या है?
Strait of Hormuz एक संकरा लेकिन बेहद रणनीतिक समुद्री मार्ग है जो Persian Gulf को Gulf of Oman और आगे Arabian Sea से जोड़ता है. यही रास्ता खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस को दुनिया के बाकी हिस्सों तक पहुंचाने का मेन मार्ग है.
भौगोलिक रूप से ये स्ट्रेट उत्तर में Iran और दक्षिण में Musandam Peninsula (जो Oman का हिस्सा है) तथा United Arab Emirates के बीच स्थित है. इसी लोकेशन की वजह से ये दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्रों के बिल्कुल केंद्र में आता है.
छोटा रास्ता, लेकिन वैश्विक असर
वैश्विक महत्व के बावजूद ये समुद्री रास्ता काफी संकरा है. अपने सबसे पतले हिस्से में इसकी चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर के आसपास मानी जाती है. जहाजों के लिए तय शिपिंग लेन इससे भी छोटी होती है, जिससे विशाल तेल टैंकरों को सीमित समुद्री कॉरिडोर से गुजरना पड़ता है.
हर दिन सैकड़ों जहाज- खासकर कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस ले जाने वाले टैंकर इसी मार्ग से गुजरते हैं. इसलिए अगर यहां थोड़ी देर के लिए भी आवाजाही रुकती है तो वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजारों पर तुरंत असर पड़ सकता है.
दुनिया का अहम ऊर्जा चोकपॉइंट
विशेषज्ञ अक्सर Strait of Hormuz को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट बताते हैं. अनुमान है कि वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है.
Saudi Arabia, Iran, United Arab Emirates, Kuwait और Iraq जैसे बड़े तेल उत्पादक देश एशिया, यूरोप और अन्य बाजारों तक अपने ऊर्जा संसाधन भेजने के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं. यही वजह है कि इसे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन भी कहा जाता है.
होर्मुज नाम की उत्पत्ति कैसे हुई?
होर्मुज नाम के पीछे कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कहानियां जुड़ी हैं. एक प्रचलित मान्यता के अनुसार ये नाम मध्य-फारसी शब्द होरमोज से निकला है, जो प्राचीन ज़ोरोस्ट्रियन धर्म के प्रमुख देवता Ahura Mazda से जुड़ा माना जाता है. इस धारणा के अनुसार प्राचीन फारसी लोग इस समुद्री मार्ग को पवित्र मानते थे और इसे देवता से जुड़ी पवित्र राह के रूप में देखते थे.

