जन्मजात कोलोबोमा क्या है? आंख में कहां होता है और कैसे करें इसकी पहचान; यहां समझें

Coloboma symptoms and treatment: कोलोबोमा आंख के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है.

Published by Shubahm Srivastava
Congenital Coloboma: जन्मजात कोलोबोमा (Congenital Coloboma) आंख की एक ऐसी स्थिति है जो बच्चे के जन्म के समय से मौजूद होती है. यह तब होती है जब गर्भावस्था के दौरान आंख का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता. सामान्य रूप से भ्रूण के विकास के समय आंख के ऊतकों को पूरी तरह बंद हो जाना चाहिए, लेकिन यदि यह प्रक्रिया अधूरी रह जाए तो आंख के किसी हिस्से में गैप या कटाव जैसा दोष रह जाता है, जिसे कोलोबोमा कहा जाता है.
कोलोबोमा आंख के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है. यह पुतली (आईरिस) में हो तो पुतली का आकार सामान्य गोल की बजाय कीहोल या दरार जैसा दिखाई देता है. यह रेटिना, कोरॉयड, ऑप्टिक नर्व या पलक में भी हो सकता है. यदि यह पीछे के हिस्सों जैसे रेटिना या ऑप्टिक नर्व में हो, तो बाहर से हमेशा दिखाई नहीं देता, लेकिन दृष्टि पर असर डाल सकता है.

कैसे करें इस बीमारी की पहचान?

माता-पिता या बच्चे इसे कुछ संकेतों से पहचान सकते हैं. यदि पुतली का आकार असामान्य दिखे, आंखों में सफेद या काला धब्बा नजर आए, बच्चा चीजों पर ठीक से फोकस न कर पाए, बार-बार आंखें मिचमिचाए या रोशनी से ज्यादा संवेदनशील हो, तो यह संकेत हो सकते हैं. कुछ बच्चों में भेंगापन (स्ट्रैबिस्मस) या कम दृष्टि भी देखी जा सकती है. सही पहचान के लिए नेत्र विशेषज्ञ द्वारा विस्तृत जांच आवश्यक होती है.

कोलोबोमा के लक्षण पर एक नजर

लक्षण कोलोबोमा के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करते हैं. हल्के मामलों में दृष्टि सामान्य रह सकती है, जबकि गंभीर मामलों में धुंधला दिखाई देना, दृष्टि का कुछ हिस्सा गायब होना या कम दृष्टि जैसी समस्या हो सकती है. कभी-कभी यह अन्य जन्मजात विकारों के साथ भी जुड़ा हो सकता है.

क्या इलाज से हो सकता है सही?

इलाज पूरी तरह से दोष को ठीक नहीं कर सकता, लेकिन लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है. आईरिस कोलोबोमा में कॉस्मेटिक कॉन्टैक्ट लेंस उपयोग किए जा सकते हैं. दृष्टि कमजोर होने पर चश्मा या लो-विजन एड्स दिए जाते हैं. कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है, खासकर यदि पलक में कोलोबोमा हो. नियमित आंखों की जांच और विजन थेरेपी भी मददगार हो सकती है.
रोकथाम पूरी तरह संभव नहीं है, क्योंकि यह गर्भावस्था के दौरान विकास संबंधी समस्या से जुड़ा है. फिर भी, गर्भावस्था में संतुलित आहार, फोलिक एसिड का सेवन, संक्रमण से बचाव और डॉक्टर की नियमित जांच जोखिम कम करने में सहायक हो सकते हैं. समय पर पहचान और सही प्रबंधन से बच्चे की दृष्टि और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है.

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