Fat Burn या Health Burn? 25 साल की लड़की ने अपनाया 36 घंटे का फास्ट, 1 महीने में घटाया 5 किलो वजन..!

What is a 36-hour fasting routine: इन दिनों लोग अपना वजन कम करने के लिए न जानें क्या-क्या करते हैं. वजन घटाने के लिए 36 घंटे का उपवास कुछ लोगों के लिए कारगर हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों को इसका नुकसान भी होता है. फिटनेस के चक्कर में सेहत को खतरे में डालना सही नहीं – कोई भी डाइट अपनाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें!

Published by Sanskriti Jaipuria

5 Kg Weight Loss in 36 Hours : आज- कल वजन घटाने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय आजमा रहे हैं. हर कोई चाह रहा है कि वो कैसे भी पतला हो जाए. कुछ लोग डाइटिंग करते हैं, कुछ जिम जाते हैं, और कुछ लोग उपवास (फास्टिंग) को भी आजमाते हैं. हाल ही में एक 25 साल की लड़की ने वजन कम करने के लिए 36 घंटे का इंटरमिटेंट फास्टिंग शेड्यूल अपनाया. Indian Express के मुताबिक, उसका वजन 95 किलो था और बीएमआई 34 था, जो मोटापे की कैटेगरी में आता है.

उस लड़की को उम्मीद थी कि ये तरीका जरूर उसकी मदद करेगा और उसने एक महीने में 5 किलो वजन भी कम कर लिया. लेकिन इसके साथ-साथ उसे थकान, गैस, एसिडिटी और नींद की समस्या होने लगी. इसीलिए अब लोगों के मन में एक सवाल उठने लगा है कि – क्या ये डाइट सच में फायदेमंद है, या इसमें खतरे छिपे हैं?

36 घंटे का फास्टिंग क्या होता है?

इस डाइट में व्यक्ति 36 घंटे तक कुछ भी नहीं खाता है. उदाहरण के लिए, अगर रविवार को शाम को जल्दी खाना खा लिया जाए, तो अगला खाना मंगलवार की सुबह खाया जाता है. इस दौरान सिर्फ पानी, बिना कैलोरी वाली चाय या ड्रिंक्स ली जा सकती हैं.

इससे शरीर को जब खाना नहीं मिलता, तो वो जमा हुई चर्बी को एनर्जी में बदलने लगता है. इसी वजह से वजन घटता है.

शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

12 घंटे के बाद: शरीर अपने जमा हुए ग्लाइकोजन (शुगर स्टोरेज) को इस्तेमाल करना शुरू करता है. इंसुलिन का लेवल गिरने लगता है, जिससे फैट बर्निंग शुरू होती है.

18–24 घंटे के बाद: शरीर फैट को ब्रेक करके फैटी एसिड और कीटोन में बदलता है, जिससे मस्तिष्क और शरीर को एनर्जी मिलती है. इसे कीटोसिस (Ketosis) कहते हैं.

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24–36 घंटे के बाद: एक प्रोसेसे शुरू होता है जिसे ऑटोफेजी कहते हैं. इसमें शरीर पुरानी और खराब कोशिकाओं को साफ करता है और नई कोशिकाओं के लिए जगह बनाता है. कुछ रिसर्च मानती हैं कि इससे कैंसर और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से बचाव हो सकता है, लेकिन अभी और मानव रिसर्च की जरूरत है.

फास्टिंग के दौरान कैसा महसूस होता है?

कुछ लोगों को फास्टिंग के दौरान ज्यादा फोकस और एनर्जी महसूस होती है. लेकिन सबके लिए ये आसान नहीं होता. कुछ लोगों को चिड़चिड़ापन, थकान और कमजोरी महसूस होती है, खासकर शुरूआती दिनों में. भूख का अहसास भी शुरू में ज्यादा होता है, जो फिर धीरे-धीरे कम होने लगता है.

क्या ये तरीका सबके लिए सेफ है?

Indian Express से बातचीत के दौरान डॉ. सुधीप खन्ना ने कहा हैं कि यदि आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं और अच्छी तरह हाइड्रेटेड रहते हैं, तो 36 घंटे की फास्टिंग ज्यादा खतरनाक नहीं है. लेकिन ये तरीका डायबिटीज के मरीजों, प्रेग्नेंट महिलाओं, खाने से जुड़ी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों या कुछ दवाइयां लेने वालों के लिए नहीं है – जब तक कि डॉक्टर की निगरानी में न हो.

इसके क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

डॉ. ऋचा चतुर्वेदी बताती हैं कि लंबे समय तक फास्टिंग करने से शरीर में केटोन बढ़ जाते हैं, जो एसिडिक होते हैं. पानी कम पीने से इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, जिससे चक्कर, सिरदर्द और थकान हो सकती है.

अगर आप वजन घटाने के लिए 36 घंटे की फास्टिंग करने की सोच रहे हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें. ये तरीका कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसके साथ आने वाले जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

Sanskriti Jaipuria
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