Nerve Damage: मानव शरीर की पूरी कार्यप्रणाली तंत्रिकाओं के जाल पर आधारित है. दिमाग से निकलने वाले संदेश नसों के जरिए शरीर के हर हिस्से तक पहुंचते हैं और हमें चलने, महसूस करने, बोलने और सोचने की क्षमता देते हैं. जब इन तंत्रिकाओं को किसी कारण से नुकसान पहुंचता है तो इसे तंत्रिका क्षति या नर्व डैमेज कहा जाता है. शुरुआत में इसके लक्षण हल्के दिखाई दे सकते हैं, लेकिन समय रहते पहचान न हो तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है.
तंत्रिका क्षति होने के यह हैं लक्षण
तंत्रिका क्षति की स्थिति में नसें सामान्य रूप से संकेतों का आदान-प्रदान नहीं कर पातीं. इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर की कौन-सी तंत्रिका प्रभावित हुई है. अगर संवेदनाओं से जुड़ी नसें प्रभावित होती हैं तो हाथ या पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, जलन या सुई चुभने जैसा अहसास हो सकता है. कई लोगों को ऐसा लगता है जैसे उनके पैर “सो” गए हों या उनमें जान न हो. वहीं, अगर मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसें प्रभावित हों तो कमजोरी, चीजें पकड़ने में दिक्कत या चलने में असंतुलन महसूस हो सकता है. कुछ मामलों में मरीज बार-बार गिरने लगते हैं या सीढ़ियां चढ़ना कठिन हो जाता है.
स्वायत्त तंत्रिकाएं शरीर के इस हिस्से का नियंत्रित करती हैं
स्वायत्त तंत्रिकाएं, जो दिल की धड़कन, पाचन, पसीना और ब्लड प्रेशर जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करती हैं, अगर क्षतिग्रस्त हो जाएं तो स्थिति और जटिल हो सकती है. ऐसे में व्यक्ति को चक्कर आना, ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना या बढ़ना, पाचन संबंधी गड़बड़ी या पेशाब से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक समस्या बनी रहने पर घाव भरने में देरी, मांसपेशियों का कमजोर होना और स्थायी क्षति तक की आशंका रहती है.
तंत्रिका क्षति के होते हैं कई कारण
तंत्रिका क्षति के पीछे कई कारण हो सकते हैं. लंबे समय तक अनियंत्रित मधुमेह नसों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है और यह सबसे आम कारणों में गिना जाता है. इसके अलावा विटामिन B12 की कमी, गंभीर चोट या दुर्घटना, वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण, अत्यधिक शराब का सेवन, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव और ऑटोइम्यून बीमारियां भी नसों को प्रभावित कर सकती हैं. किडनी या लिवर से जुड़ी पुरानी बीमारियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं.
इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का मानना है कि अगर शरीर में बार-बार झनझनाहट, सुन्नपन या बिना वजह कमजोरी महसूस हो रही हो तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच से कारण का पता लगाया जा सकता है और सही उपचार शुरू किया जा सकता है. उपचार पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या की जड़ क्या है. ब्लड शुगर नियंत्रण में रखना, संतुलित आहार लेना, विटामिन की कमी पूरी करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना तंत्रिका क्षति के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है.

