क्या आपने कभी सोचा है, मेदु वड़ा के बीच क्यों होता है ‘छेद’? ये 3 वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान!

मेदु वड़ा के बीच छेद सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान है! जानिए कैसे यह छोटा सा छेद वड़ा को क्रिस्पी और स्वादिष्ट बनाता है. ये 3 बड़े कारण आपको हैरान कर देंगे!

Published by Shivani Singh

गर्म, क्रिस्पी वड़ा के बिना साउथ इंडियन खाना अधूरा माना जाता है. बाहर से क्रिस्पी और अंदर से नरम और फूला हुआ यह स्वादिष्ट डिश स्वाद और आराम से भरपूर है, जो इसे नाश्ते या स्नैक के लिए एक परफेक्ट ऑप्शन बनाती है. चाहे सांभर में डुबोकर खाया जाए या मसालेदार चटनी के साथ परोसा जाए, इस पसंदीदा डिश ने फेस्टिव खाने में भी अपनी जगह बना ली है. लेकिन एक बात है जिस पर शायद आपने ध्यान नहीं दिया होगा! कई दूसरी डिशेज़ की तरह, इसमें भी बीच में एक खास छेद होता है.

इसे एक अनोखी परंपरा माना जाता है, लेकिन क्या इसमें और भी कुछ हो सकता है जो हमें दिखाई नहीं देता? इस छेद की अपनी एक कहानी है, जो आपकी सोच से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है. आइए समझते हैं कि यह डिटेल इतनी महत्वपूर्ण क्यों है.

डिश का टेक्सचर

वड़ा की सबसे खास बात उसका टेक्सचर है. क्रिस्पी बाहरी परत और हल्का, फूला हुआ अंदर का हिस्सा एक परफेक्ट बैलेंस बनाता है, जिससे इसे डोनट जैसा आकार मिलता है. बीच का छेद वड़ा को बीच से बहुत ज़्यादा घना होने से रोकता है और भाप को बाहर निकलने देता है, जिससे बाहर से यह हल्का और हवादार बनता है.

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बराबर पकना सुनिश्चित करता है

इस अनोखी खासियत का एक मुख्य कारण तलने की प्रक्रिया है. गाढ़ा घोल गर्म तेल में डाला जाता है. इससे वड़ा का बाहरी हिस्सा जल्दी पक जाता है, लेकिन छेद के बिना बीच का हिस्सा कच्चा या गीला रह जाएगा. छेद यह सुनिश्चित करता है कि वड़ा अच्छी तरह और बराबर पके, जिससे बाहर से यह सुनहरा भूरा हो जाता है.

तलने की प्रक्रिया को तेज़ करता है

गाढ़े घोल को तलना एक मुश्किल काम माना जाता है, और छेद के बिना, वड़ा को पकने में ज़्यादा समय लगेगा. इससे अंदर के पकने से पहले बाहर के जलने का खतरा बढ़ जाता है. छेद खाना पकाने की प्रक्रिया को तेज़ करता है, जिससे नौसिखिया और प्रोफेशनल दोनों तरह के कुक के लिए इसे संभालना आसान हो जाता है. यह आसान ट्रिक समय बचाती है और कंसिस्टेंसी सुनिश्चित करती है.

यह परंपरा आज भी जारी है. कई भारतीय घरों में हाथ से वड़ा बनाना और बीच में एक छोटा सा छेद बनाना सदियों पुरानी परंपरा मानी जाती है. यह सिर्फ एक साधारण डिज़ाइन नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक रीति-रिवाज है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। वड़ा बनाने की कला दादी और माँ से सीखी जाती है. यह छेद सिर्फ एक खाना पकाने की तकनीक नहीं है, बल्कि इस डिश की एक खास पहचान है जो इसे दूसरों से अलग बनाती है.

Shivani Singh
Published by Shivani Singh

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