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जन्म देने वाली भी जिंदा, पालने वाली भी… फिर भी 2 महीने का मासूम बच्चा हुआ अनाथ, सरोगेसी के नाम पर चल रहे गंदे खेल का पर्दाफाश

Surrogacy Racket Busted: सरोगेसी के नाम पर चल रहे गंदे खेल का पर्दाफाश हुआ है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि, हैदराबाद पुलिस ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया है। लेकिन इन सबके बीच, दो परिवार होने के बावजूद एक दो महीने की मासूम 'अनाथ' की तरह जीने को मजबूर है।

Published by Sohail Rahman

Surrogacy Racket Busted: सरोगेसी के नाम पर चल रहे गंदे धंधे का पर्दाफाश हुआ है। जिसे सुनकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। पति-पत्नी ने अपनी जैविक संतान पाने के लिए सरोगेसी का सहारा लिया। लाखों रुपये खर्च किए, इंतजार किया। लेकिन उन्हें जो बच्चा सौंपा गया, वह असल में उनका नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों या भिखारियों से अवैध रूप से खरीदा गया एक मासूम बच्चा था। हैदराबाद पुलिस ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया है। लेकिन इन सबके बीच, दो परिवार होने के बावजूद एक दो महीने की मासूम ‘अनाथ’ की तरह जीने को मजबूर है।

कौन है मास्टरमाइंड?

सिकंदराबाद में यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी सेंटर चलाने वाली डॉ. अथालुरी नम्रता इस पूरे खेल की मास्टरमाइंड थीं। उनके पति डॉ. नरगुला सदानन्दम, जो एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं, और वकील बेटा पी. जयंत कृष्णा भी इसमें शामिल थे। ये लोग दम्पति को सरोगेसी के जरिए बच्चा पैदा करने का तरीका बताते थे। उन्हें यकीन दिलाया जाता था कि यह उनका जैविक बच्चा होगा। फिर शुरू होता था असली खेल। जाँच, परीक्षण और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर उनसे पैसे ऐंठे जाते थे।

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पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि, पीड़ित परिवार से 35 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। जून 2025 में उन्हें बताया गया कि सरोगेट माँ ने एक बेटे को जन्म दिया है। लेकिन बच्चा सर्जरी से हुआ था, और उसके लिए 2 लाख रुपये अलग से लगेंगे। जन्म प्रमाण पत्र वगैरह सब बनवा लिए गए। जबकि सच्चाई यह थी कि इस मासूम बच्चे को असम के एक मज़दूर दम्पति से 90,000 रुपये में ख़रीदा गया था। यह दम्पति हैदराबाद में बस गया था। जन्म के दो दिन बाद ही इस मासूम बच्चे को असली माँ की गोद से छीनकर एक ऐसी महिला को सौंप दिया गया जो सरोगेसी के ज़रिए माँ बनना चाहती थी।

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मासूम बच्चे का भविष्य अधर में

इन सबके बीच, कुछ दिन पहले ही दुनिया में आए मासूम बच्चे का भविष्य अधर में लटक रहा है। सरोगेसी का विकल्प चुनने वाले माता-पिता अब इस बच्चे को गोद लेने को तैयार नहीं हैं। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) का नियम कहता है कि दो महीने के भीतर बच्चे को जन्म देने वाले माता-पिता उस पर दावा कर सकते हैं। लेकिन यह भी संभव नहीं है क्योंकि दोनों जेल में हैं। अगर दो महीने के भीतर असम के परिवार से कोई भी बच्चे को लेने के लिए आगे नहीं आता है, तो नियमानुसार उसे गोद लिया जा सकता है। उस मासूम बच्चे को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं है कि दो महीने पहले पैदा होने के बाद वो किस मुसीबत में फँस गया है। पुलिस का मानना है कि ये मामला तो बस एक छोटा सा उदाहरण है, ये रैकेट बहुत बड़ा है।

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Sohail Rahman
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