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Sharad Ajit Relation: ‘सबसे बड़ा बोझ होता है बाप के कंधों पर बेटे का जनाजा’ आखिर क्यों सबसे ज्यादा तकलीफ में हैं शरद पवार

Sharad Pawar Ajit Pawar Relation: होनहार भतीजे अजित पवार को असमय खोने के बाद उनके शव को कंधा देने वाले शरद पवार सबसे ज्यादा दर्द में हैं. जुबान से भले ही वह कुछ ना बोलें, लेकिन उनकी आंखों और चेहरे पर तकलीफ देखी जा सकती है.

Published by JP Yadav

Sharad Pawar Ajit Pawar Relation: ‘दुनिया का सबसे बड़ा बोझ क्या होता है? बाप के कंधों पर बेटे का जनाजा’ भारतीय सिनेमा की सबसे कामयाब फिल्म ‘शोले’ का यह डायलॉग किसी हद तक महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और राजनीति में राज्य के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार पर करीब-करीब फिट बैठता है. भले ही अजित पवार के पिता शरद पवार नहीं थे, लेकिन उन्होंने राजनीति में उन्हें जन्म तो जरूर दिया. महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार ने ही भतीजे अजित पवार को राजनीति में पाला-पोसा और फिर बड़ा किया. इस लायक बना दिया कि अजित पवार स्थानीय निकाय चुनाव जीतने से लेकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम की कुर्सी तक पहुंचे. ‘पवार परिवार’ के पेड़ की शाखाओं में अजित पवार भी जड़ों तक जुड़े थे. भले ही राजनीतिक मतभेद और महत्वकांक्षा के चलते शरद पवार से भतीजे अजित पवार अलग हुए, लेकिन सम्मान बना रहा. अजित पवार ने हो सकता है कभी चाचा शरद पवार को लेकर शालीन भाषा में आलोचनात्मक बातें कहीं हों, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य ने एक शब्द भी भतीजे के लिए नहीं बोला. सार्वजनिक रूप से जब भी अजित पवार अपने चाचा शरद पवार से मिले तो पैर छूकर आशीर्वाद ही लिया. 

शरद पवार के मन का दर्द!

महाराष्ट्र की राजनीति के जानकार मानते हैं कि भले ही शरद पवार और अजित पवार के बीच मतभेद रहे हों. अजित पवार ने चाचा शरद पवार की राजनीतिक पार्टी तक हड़प ली, लेकिन मनभेद तो कतई नहीं रहा. शायद यही वजह है कि दोनों परिवार आपस में मिलते हैं. तीज-त्योहार मनाते हैं. यहां तक जब सुप्रिया सुले (शरद पवार की बेटी) और सुनेत्रा पवार (अजित पवार की पत्नी) ने बारामती से चुनाव लड़ा तो एक शब्द भी एक-दूसरे खिलाफ नहीं बोला. यहां तक कि गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को अजित पवार के अंतिम संस्कार के दौरान सुप्रिया सुले आगे रहें. वह आए लोगों के साथ कार्यकर्ताओं और समर्थकों को हर जरूरी दिशा-निर्देश भी देती रहीं. ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पवार परिवार एक पेड़ की तरह है. शाखाएं भले ही दूर तक गईं, लेकिन जड़ों से जुड़ी रहीं. शरद पवार ने गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को जब अजित पवार का जनाजा कंधों पर उठाया तो उनके जीवन का सबसे बड़ा बोझ था. शरद पवार ने भतीजे की अर्थी को कांधा देते समय जो महसूस किया होगा वह महाराष्ट्र की राजनीति का चाणक्य ही महसूस कर सकता है, दुनिया का कोई और शख्स नहीं. 

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बारामती में किया गया अजित पवार का अंतिम संस्कार

बारामती के काटेवाड़ी में महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार का अंतिम संस्कार पूरी रस्में करने के बाद किया गया. इस दौरान अजित की पत्नी सुनेत्रा पवार, दोनों बेटे पार्थ-जय, चाचा शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले विद्या प्रतिष्ठान में मौजूद रहीं. अंतिम संस्कार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे भी पहुंचे. इन सभी अजित पवार का श्रद्धांजलि दी. इससे पहले अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए. अपने नेता को देखने लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा. खासतौर से बारामती की सड़कों पर जाम लग गया. अंतिम संस्कार से पहले अजित के पार्थिव शरीर को काटेवाड़ी स्थित उनके आवास लाया गया गया था. यहां पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. 

हादसे में अजित पवार समेत 5 लोगों की गई थी जान

यहां पर बता दें कि अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन बुधवार सुबह 8.45 बजे क्रैश हुआ था.बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान प्लेन क्रैश हुआ, जिसमें 66 वर्षीय नेता की मौत हो गई. उनके साथ सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू समेत 5 लोगों की मौत हुई. अजित पवार 5 फरवरी को पुणे में होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए 4 रैलियों को संबोधित करने वाले थे.

JP Yadav
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