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Shaurya Yatra: 1000 साल का स्वाभिमान, 108 घोड़ों की शौर्य यात्रा…पीएम मोदी भी होंगे शामिल; यहां जानें ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का इतिहास

Somnath Swabhiman Parv: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, 72-घंटे अखंड ओंकार जाप, और आधुनिक कार्यक्रमों जैसे 3,000-ड्रोन शो भी शामिल होते हैं.

Published by Shubahm Srivastava

PM Modi to Visit Somnath Temple: गुजरात के गिर सोमनाथ ज़िले में वेरावल के पास सोमनाथ मंदिर में गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को चार दिवसीय ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ शुरू हुआ. अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो 10 जनवरी से गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर आने वाले हैं, 11 जनवरी को मंदिर में पूजा करेंगे और ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व करेंगे. यह 1 किलोमीटर लंबा रोड शो होगा जिसमें 108 घोड़े शामिल होंगे.

पीएम मोदी ने X पर दी जानकारी

यह उत्सव महमूद गजनवी द्वारा मंदिर पर पहले हमले के 1,000 साल पूरे होने का भी प्रतीक है. पीएम मोदी ने गुरुवार को X पर एक पोस्ट में सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं को याद किया और मंदिर पर बार-बार हमलों के बावजूद आस्था की मज़बूती पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि 1026 में हुए हमले और उसके बाद के आक्रमण भारत के आध्यात्मिक संकल्प को कमज़ोर करने में विफल रहे और इसके बजाय सांस्कृतिक एकता को मज़बूत किया, जिससे मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण हुआ.

उद्घाटन के समय केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और गुजरात के मंत्री जीतू वाघाणी और प्रद्युम्न वाजा मौजूद थे. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि इस कार्यक्रम ने देश भर के लोगों को भारत की विरासत और सांस्कृतिक पहचान का जश्न मनाने का अवसर दिया है.

‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का क्या है इतिहास?

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व एक विशेष धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव है जो सोमनाथ मंदिर की सहनशीलता, पुनर्निर्माण और अटूट आस्था को श्रद्धांजलि देता है. इस पर्व का मुख्य उद्देश्य सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिक यात्रा — आक्रमण, विनाश और पुनर्निर्माण के संघर्ष और फिर से उठ खड़े होने के प्रतीक को उजागर करना है. 2026 में यह पर्व पहले दर्ज़ किए गए हमला (1026 ई.) के 1000 वर्ष पूरे होने के सम्मान में आयोजित किया जा रहा है. 

सोमनाथ मंदिर के इतिहास पर एक नजर

सोमनाथ मंदिर, जो गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित है, हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला माना जाता है और सदियों से श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थस्थान रहा है. जनवरी 1026 में महमूद गजनवी के हमले के बाद मंदिर बार-बार नष्ट हुआ लेकिन प्रत्येक बार विश्वास और सामूहिक प्रयास से पुनर्निर्मित हुआ, जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति की अटूट आत्मा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बन गया. 

72-घंटे अखंड ओंकार जाप, सांस्कृतिक कार्यक्रम

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, 72-घंटे अखंड ओंकार जाप, और आधुनिक कार्यक्रमों जैसे 3,000-ड्रोन शो भी शामिल होते हैं, जिनका उद्देश्य मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना है. प्रधानमंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्ति भी इस पर्व में भाग लेते हैं और इसे देश की सांस्कृतिक पहचान और गर्व का अवसर बताते हैं. 

ये आयोजन भारत की अटूट आस्था – पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन को भारत की अटूट आस्था, भारतीय सभ्यता की शक्ति और उन लोगों को स्मरण करने का अवसर बताया है, जिन्होंने अपने सिद्धांतों और मूल्य-आधारित जीवन को कभी नहीं छोड़ा. उन्होंने लोगों से इस पर्व के दौरान अपनी स्मृतियों और तस्वीरों को साझा करने का भी आग्रह किया है, ताकि समूहिक राष्ट्रीय गौरव और एकता को बढ़ावा दिया जा सके. 

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति और आत्म-गौरव का उत्सव है, जिसमें इंडिया की सहनशीलता और पुनर्निर्माण की प्रेरणादायक कथा को याद किया जाता है. 

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Shubahm Srivastava

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