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‘तब तक रूस से तेल खरीदना जारी रहेगा…’ टैरिफ के बीच ONGC का Trump को सीधा संदेश

ONGC On Trump Tariff: ONGC की तरफ से कहा गया है कि वो रूस से तब तक तेल खरीदना जारी रखेगी, जब तक कि उन्हें ऐसा करना कमर्शियली सही लगता है।

Published by Shubahm Srivastava

ONGC On Trump Tariff: रूस से तेल खरीदने को लेकर इस वक्त भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड वार जैसे हालात हो गए हैं। ट्रंप लगातार भारत पर हमलावर हो रखे हैं। अब इस कड़ी में सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को कंपनी की तरफ से कहा गया है कि वह रूस से तब तक तेल खरीदना जारी रखेगी, जब तक कि उन्हें ऐसा करना कमर्शियली सही लगता है।

कंपनी का ये बयान ऐसे वक्त पर आया है, जब ट्रंप की तरफ से भारत पर 25 परसेंट के बेसलाइन टैरिफ को बढ़ाकर अब 50 परसेंट कर दिया है। ये कदम एक्स्ट्रा 25 परसेंट रूस से तेल की खरीद को लेकर पेनाल्टी के तौर पर लगाया गया है।

कंपनी की दो इकाइयां – हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स – अपनी रिफाइनरियों के लिए नियमित रूप से रूस से तेल खरीदती हैं।

जब तक सरकार नहीं बोलेगी, तेल खरीदना जारी रखेंगे

आपको बता दें कि ओएनजीसी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह का कहना है, “रूसी तेल पर अभी कोई प्रतिबंध नहीं है। जब तक सरकार कोई और फैसला नहीं लेती, हम खरीदारी जारी रखेंगे।” कंपनी ने यह भी कहा कि अगर ओएनजीसी को सही कीमत पर ऊर्जा संपत्तियाँ मिलती हैं, तो वह विदेशों में भी उनके अधिग्रहण पर विचार करेगी।

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इसके अलावा, ओएनजीसी विदेश के प्रबंध निदेशक राजर्षि गुप्ता ने भी पहले कहा था कि कंपनी अमेरिका में एलएनजी और अपस्ट्रीम परिसंपत्तियों में निवेश करने पर विचार कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया समेत कई अन्य देशों में और अधिक ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परिसंपत्तियों की तलाश में है।

ONGC के 21 प्रोजेक्ट, लागत 66,000 करोड़ रुपये

जानकारी के लिए बता दें कि ओएनजीसी इस समय 21 परियोजनाओं पर काम कर रही है। कंपनी चालू वित्त वर्ष में अपने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की भी योजना बना रही है। इस समय उसकी 21 परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 66,000 करोड़ रुपये है। इनमें से नौ विकास परियोजनाएँ हैं और बाकी बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाएँ हैं।

भारत-चीन खरीद रहे रूस से तेल

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद से भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात और बढ़ा दिया है। यही वजह है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ भारत पर इसे रोकने का दबाव बना रहे हैं। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2018 में भारत के कुल तेल आयात का लगभग 1.3 प्रतिशत रूस से आया था। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 35 प्रतिशत हो गया।

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