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Odisha Crime: शिक्षक पर छात्राओं से यौन उत्पीड़न का आरोप, निलंबन के साथ जांच शुरू

Odisha Crime: सुंदरगढ़ में संस्कृत शिक्षक पर छात्राओं से यौन उत्पीड़न का आरोप, निलंबन के साथ जांच शुरू

Published by Swarnim Suprakash

सुंदरगढ़, ओडिशा से अक्षय महाराणा की रिपोर्ट 
Odisha Crime: सुंदरगढ़ जिले के गुरुंडिया ब्लॉक के एक सरकारी हाई स्कूल से ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा जगत को हिलाकर रख दिया है। यहाँ कार्यरत संस्कृत शिक्षक पर कक्षा 9वीं और 10वीं की सात छात्राओं ने यौन शोषण और अनुचित व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत दर्ज होते ही शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शिक्षक को निलंबित कर दिया है।

बिना देर किए पुलिस को दियालिखित में शिकायत

जानकारी के मुताबिक, छात्राओं ने साहस दिखाते हुए अपनी पीड़ा स्कूल की प्रधानाध्यापिका के सामने रखी। उनका आरोप था कि संस्कृत शिक्षक कक्षाओं के दौरान अनुचित हरकतें करते थे और मानसिक रूप से भी उन्हें परेशान करते थे। छात्राओं की आपबीती सुनने के बाद प्रधानाध्यापिका ने बिना देर किए पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

अधिकारी के आदेश के बिना , क्षेत्र से बहार न जाए आरोपी शिक्षक

शिकायत मिलते ही अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (ADEO) सरंगधर बड़िहा ने तुरंत आदेश जारी कर शिक्षक को निलंबित कर दिया। निलंबन पत्र में साफ उल्लेख किया गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप “गंभीर अनुशासनहीनता और छात्राओं के साथ यौन दुर्व्यवहार” की श्रेणी में आते हैं।
निलंबन के बाद आरोपी शिक्षक को ब्लॉक शिक्षा कार्यालय में हाजिर होने का निर्देश दिया गया है। साथ ही उन्हें आदेश दिया गया है कि वे बिना ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय क्षेत्र से बाहर नहीं जाएंगे।

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पुलिस ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। छात्राओं के बयान दर्ज किया जा रहा हैं और अन्य गवाहों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपों की सत्यता जांच के बाद स्पष्ट हो जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छात्राओं का सहस – समाज के लिए पेरणा

घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में गुस्सा फैल गया है। स्थानीय लोगों और छात्राओं के अभिभावकों ने आरोपी शिक्षक को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है। शिक्षक बच्चों के मार्गदर्शक होते हैं, लेकिन जब वही शिक्षक बच्चों के साथ गलत हरकत करें तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है।
यह घटना फिर से साबित करती है कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति स्कूल प्रशासन और विभाग को और अधिक संवेदनशील होना चाहिए। छात्राओं ने जो साहस दिखाया, वह समाज के लिए प्रेरणा है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और आगामी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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Swarnim Suprakash
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