Success story of how daughter becomes an Army Officer: वो कहते हैं न अगर जज्बा हो तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता है . एक ऐसे ही देश का सीना और भी ज्यादा ऊंचा करने वाली कहानी के बारे में आपको बताने जा रहे हैं. यह कोई साधारण कहानी नहीं है, उस बाप के खून और पसीने के मेहनत के बारे में जिनकी वजह से उनकी बेटी ने न सिर्फ अपने पिता और परिवार का बल्कि पूरे भारत का सीना गर्व से ऊंचा कर दिया है.
22 साल की युवती ने किया सभी को हैरान
मणिपुर के सेनापति जिले की 22 साल की सी. एनोनी ने वह कर दिखाया है जो हर किसी के बस की बात नहीं है. उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से पास आउट होकर इतिहास रच दिया है. दरअसल, एक निजी सुरक्षा गार्ड की बेटी और छह भाई-बहनों में सबसे छोटी एनोनी, ‘माओ नागा’ समुदाय से भारतीय सेना में अधिकारी बनने वाली पहली महिला बन गईं हैं. 8वीं कक्षा में देखे गए सपने को अपनी कड़ी मेहनत और पिता के बलिदान के दम पर उन्होंने इस सपने को आज पूरी तरह से हकीकत में बदलने का सच देखा है.
8वीं क्लास का सपना और पिता का बलिदान
सी. एनोनी का सेना में जाने का सफर मणिपुर के रालूनामेई गांव की तंग गलियों से ही शुरू हो गया था, जब वह 8वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहीं थीं. इसके साथ ही एनसीसी (NCC) के माध्यम से उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की और फिर अपने सपनों को सच करने के लिए देश की राजधानी दिल्ली आ गईं. राजधानी दिल्ली में उन्होंने एनसीसी की सीनियर विंग में शामिल होकर खुद को सैन्य जीवन की कठिन चुनौतियों के लिए तैयार करना शुरू कर दिया.
माओ नागा समुदाय की पहली महिला सैन्य अधिकारी
दरअसल, एनोनी का ताल्लुक माओ नागा समुदाय से ही है. तो वहीं, मणिपुर और नागालैंड की सीमा पर बसी इस जनजाति की अपनी एक समृद्ध संस्कृति है, लेकिन इस समुदाय से अब तक किसी बेटी ने सेना में अधिकारी का पद पहले कभी भी हासिल नहीं किया था. हालाँकि, 1 लाख से ज्यादा की आबादी वाले इस समुदाय के लिए एनोनी हर किसी के लिए प्रेरणादायक बन गईं हैं. उनकी यह कड़ी सफलता सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश की बेटियों को यह संदेश देता है कि महिला चाहे तो वह क्या कुछ नहीं बन सकती हैं.
एनोनी ने अपने पिता को दिया सफलता का सबसे बड़ा श्रेय
एनोनी की सफलता के पीछे उनके पिता का सालों का त्याग छिपा है. उनके पिता एक प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते हैं. 8 सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण करना कितना ज्यादा कठिन होता है यह केवल एक पिता ही जानता है. आईएमए (IMA) की ट्रेनिंग के दौरान जब भी एनोनी थकती थीं, तो उन्हें अपने पिता का संघर्ष हमेशा याद आता था. अपने पिता के संघर्ष को याद करते हुए, अपनी कड़ी मेहनत और लगन से आज उन्होंने अपने पिता को अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय दिया है.
आखिर कब आया सफलता का गौरवशाली क्षण?
देहरादून की भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में जब पासिंग आउट परेड हुई, तो वह दृश्य उत्साह से भरने वाला था. जिस पिता ने उम्र भर दूसरों की सुरक्षा के लिए लाठी थामी थी, आज उनकी बेटी देश की सुरक्षा के लिए तलवार और कंधे पर सितारे सजाए खड़ी उनकी आंखों के सामने थीं. एनोनी की यह कहानी साबित करती है कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो अभावों के बीच भी सफलता का इतिहास लिखा जा सकता है.

