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‘लड़ाकू विमानों का इंजन भी…’, लाल किले से PM मोदी का ऐलान सुन और खिसिया जाएगा अमेरिका, PAK के भी छूट जाएंगे पसीने

Independence Day 2025: 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में स्वदेशी लड़ाकू जेट इंजन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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Independence Day 2025: 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में स्वदेशी लड़ाकू जेट इंजन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए, उन्होंने कहा कि भारत को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी और रक्षा निर्माण में अपने प्रयासों को और तेज़ करना होगा। प्रधानमंत्री ने देश के युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और सभी सरकारी विभागों का आह्वान किया कि भारत के ‘मेड इन इंडिया’ लड़ाकू विमानों का इंजन भी पूरी तरह से स्वदेशी होना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत के नागरिकों के पसीने और मिट्टी से बनी चीज़ें भारत की आत्मनिर्भरता को मज़बूत करती हैं। उन्होंने छोटे व्यापारियों से दुकानों पर स्वदेशी वस्तुओं के बोर्ड लगाने और देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा, “हम स्वदेशी का प्रयोग मजबूरी में नहीं, बल्कि ताकत से करेंगे। यही हमारा मंत्र होना चाहिए।”

आईटी से ईवी तक तकनीकी आत्मनिर्भरता

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के आईटी युग में डेटा और साइबर सुरक्षा की शक्ति बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत में ऑपरेटिंग सिस्टम, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही, आने वाले इलेक्ट्रिक वाहन युग की बात करते हुए उन्होंने कहा कि ईवी बैटरी, सोलर पैनल और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज़रूरी सभी चीज़ें भारत में ही बनाई जानी चाहिए। उनका मानना है कि देश के युवा इन सभी क्षेत्रों में नवाचार और उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।

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भारत एक साल में कुल 24 एलसीए बनाएगा

नासिक, जो अब तक मिग और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों की असेंबली के लिए जाना जाता था, अब भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की नई पहचान बनने जा रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने यहाँ अपनी तीसरी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) उत्पादन लाइन शुरू कर दी है। यह उत्पादन लाइन बेंगलुरु के बाहर पहली एलसीए निर्माण सुविधा है, जो रणनीतिक दृष्टि से एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। बेंगलुरु में पहले से ही दो एलसीए उत्पादन लाइनें हैं, जिनकी संयुक्त वार्षिक क्षमता 16 विमानों की है। अब नासिक में 8 विमानों की अतिरिक्त वार्षिक क्षमता के साथ, भारत एक वर्ष में कुल 24 एलसीए का निर्माण कर सकेगा।

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