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कर्नाटक में सत्ता संग्राम, क्या डीके शिवकुमार भी अपनाएंगे ‘शिंदे फॉर्मूला’; जानें क्या है बीजेपी का प्लान?

Karnataka politics: BJP ने एक मज़ाकिया वीडियो जारी किया जिसमें सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार, सतीश जरकीहोली और जी परमेश्वर को "म्यूज़िकल चेयर" खेलते हुए दिखाया गया है.

Published by Shubahm Srivastava

Congress Crisis In Karnataka: कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता की लड़ाई कोई नई बात नहीं है. यह लड़ाई 2023 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद शुरू हुई, जब कांग्रेस ने भारी जीत हासिल की. ​​मुख्यमंत्री पद को लेकर कई दिनों तक बातचीत चलती रही, और आखिरकार, हाईकमान ने एक समझौता किया, जिसमें सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, साथ ही एक अनौपचारिक “ढाई साल के रोटेशन फ़ॉर्मूले” पर भी सहमति बनी. अब, वही ढाई साल का वादा कांग्रेस के लिए संकट पैदा कर रहा है.

हाल ही में, BJP ने एक मज़ाकिया वीडियो जारी किया जिसमें सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार, सतीश जरकीहोली और जी परमेश्वर को “म्यूज़िकल चेयर” खेलते हुए दिखाया गया है. वीडियो का संदेश यह था कि कांग्रेस सरकार के अंदर सत्ता की लड़ाई बढ़ रही है और “नवंबर क्रांति” होने वाली है. BJP की भविष्यवाणी सच होती दिख रही है, क्योंकि शिवकुमार लगातार नाराज़गी और महत्वाकांक्षा के संकेत दिखा रहे हैं.

डीके शिवकुमार का इशारा देने वाला मैसेज

इंदिरा गांधी की जयंती पर शिवकुमार ने कन्नड़ में लिखा, “जहां मेहनत है, वहां फल है; जहां भक्ति है, वहां भगवान है.” मैसेज भले ही आसान लग रहा था, लेकिन इसे कर्नाटक की राजनीति में ढाई साल के फॉर्मूले की याद दिलाने वाला समझा गया. शिवकुमार को पहले से ही कांग्रेस का संकटमोचक माना जाता रहा है.

उन्होंने मुश्किल समय में हमेशा पार्टी के लिए ढाल का काम किया है, CBI और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के दबाव में भी नहीं झुके और संगठन के लिए बिना थके काम किया. इस बैकग्राउंड में, वह खुद को मुख्यमंत्री पद का स्वाभाविक दावेदार मानते हैं.

लेकिन, राजस्थान की तरह, हाईकमान ने एक सीनियर नेता को प्राथमिकता दी और शिवकुमार को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाया. अब, वही ढाई साल का समझौता कांग्रेस को भी अपनी चपेट में ले रहा है. सवाल यह है कि क्या शिवकुमार “कर्नाटक के एकनाथ शिंदे” बन सकते हैं?

क्या BJP आग में घी डाल रही है?

BJP का इतिहास बताता है कि वह राजनीतिक संकटों को मौकों में बदलने में माहिर है. कर्नाटक में भी BJP इस खींचतान का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रही है. शिवकुमार BJP के लिए कोई अजनबी नहीं हैं—उन्होंने रामलला के दर्शन किए हैं, कुंभ में डुबकी लगाई है, और कई BJP नेताओं के साथ उनके अच्छे पर्सनल रिश्ते हैं. यह मानना ​​स्वाभाविक है कि ज़रूरत पड़ने पर BJP उन्हें सपोर्ट कर सकती है.

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क्या सरकार गिरने की संभावना है?

कांग्रेस के पास 135 MLA हैं, इसलिए सरकार मज़बूत दिखती है. हालांकि, अंदरूनी झगड़ों से 20-25 MLA नाराज़ बताए जा रहे हैं. अगर शिवकुमार बगावत करते हैं तो उन्हें 30-40 MLAs का सपोर्ट मिल सकता है. इससे सरकार गिर सकती है या कांग्रेस को अपनी लीडरशिप बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है. हालांकि शिवकुमार ने बार-बार कहा है कि वह दल-बदल नहीं करेंगे, लेकिन राजनीति में सत्ता की चाहत अक्सर नेताओं को अपने फ़ैसले बदलने पर मजबूर कर देती है.

कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि BJP लगातार MUDA स्कैम और हाउसिंग रिश्वत जैसे मुद्दे उठा रही है. अगर जांच एजेंसियां ​​एक्टिव होती हैं, तो कुछ MLA दबाव में आ सकते हैं. ऐसे में कांग्रेस को लीडरशिप संकट को जल्द से जल्द सुलझाना होगा, नहीं तो हालात काबू से बाहर हो सकते हैं.

क्या सिद्धारमैया दिल्ली जाएंगे?

कुछ समय पहले ऐसी खबरें आई थीं कि कांग्रेस हाईकमान सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाकर उन्हें बड़ी ऑर्गनाइज़ेशनल ज़िम्मेदारियां दे सकता है, जैसे उन्हें OBC डिपार्टमेंट में शामिल करना. हालांकि, हाल के बयानों में सिद्धारमैया ने साफ कर दिया है कि वह अगले साल का बजट पेश करेंगे और अपना पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे. इससे साफ पता चलता है कि वह पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं.

कांग्रेस संकट गहराया, BJP इंतज़ार कर रही है

कर्नाटक में यह राजनीतिक खींचतान सिद्धारमैया की ज़िद और शिवकुमार की महत्वाकांक्षा का नतीजा है. गवर्नेंस खत्म होने लगी है, जनता गुस्से में है, और कांग्रेस हाईकमान कमजोर दिख रहा है. BJP इस संकट का फायदा उठाने का इंतज़ार कर रही है. अगर कांग्रेस हाईकमान समय पर तालमेल नहीं बिठा पाया, तो या तो कर्नाटक में लीडरशिप में बदलाव हो सकता है या फिर कर्नाटक में “शिंदे मॉडल” फिर से देखने को मिल सकता है.

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