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जिगरी दोस्त से दुश्मनी पड़ी भारी, बब्बू ने सीधे पीएमओ में कर दी शिकायत, मिट्टी में मिल गया छांगुर बाबा का घिनौना साम्राज्य

Changur Baba Case Latest News: छांगुर बाबा और उनके जिगरी दोस्त बब्बू चौधरी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया, फिर बब्बू ने बाबा के खिलाफ सारे सबूत जुटाए और सीधे पीएमओ में शिकायत कर दी। जिसके बाद एटीएस और एसटीएफ हरकत में आ गई।

Published by Sohail Rahman

Changur Baba Case Latest News: छांगुर बाबा के केस में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं, अब जानकारी सामने आ रही है कि उनके एक सबसे करीबी दोस्त ने ही छांगुर बाबा की शिकायत सीधे पीएमओ से कर दी, जिसके बाद छांगुर बाबा के सारे काले कारनामे खुलकर सामने आ गए। बलरामपुर जिले में वर्षों से जमे जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा का साम्राज्य अब टूटकर बिखर रहा है। उनकी अवैध गतिविधियों और धर्मांतरण के काले कारनामों का पर्दाफाश तब हुआ जब उनके सबसे करीबी वसीउद्दीन खान उर्फ बब्बू चौधरी उनके खिलाफ खड़े हो गए। छांगुर बाबा का स्थानीय स्तर पर इतना गहरा प्रभाव था कि कई शिकायतों के बावजूद कोई भी उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, लेकिन जब उनका करीबी दोस्त ही दुश्मन बन गया, तो उनके काले कारनामों का पर्दाफाश होने लगा।

सीधे पीएमओ में हुई शिकायत

जानकारी के अनुसार, छांगुर बाबा की प्रशासन में मजबूत पकड़ थी। वर्षों से वह धार्मिक आस्था के नाम पर अधिकारियों को नग देने और अपनी छवि मजबूत करने में लगा हुआ था। इसी वजह से जब तक ऊपर से दबाव नहीं पड़ा, तब तक उसके कुकृत्यों को नजरअंदाज किया जाता रहा, लेकिन स्थिति तब बदल गई जब बब्बू चौधरी ने उनकी अवैध गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेज दिए। पीएमओ के संज्ञान लेते ही राज्य की एटीएस और एसटीएफ हरकत में आ गई और फिर छांगुर बाबा का अवैध धर्मांतरण नेटवर्क सामने आने लगा।

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कैसे दोस्ती दुश्मनी में बदल गई?

बब्बू और छांगुर के बीच सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन 2021 में निर्माण कार्य के दौरान पैसों की हेराफेरी को लेकर विवाद हो गया। नीतू को शक था कि बब्बू ने निर्माण में गड़बड़ी की है और करीब ढाई करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई। इसके बाद छांगुर ने बब्बू के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया और फिर दोनों के रिश्ते में भारी दरार पड़ गई।अगले 4 वर्षों में छांगुर गिरोह और बब्बू के बीच मुकदमेबाजी का दौर शुरू हो गया। इस दौरान बब्बू ने छांगुर, उसके बेटों महबूब, नवीन और नीतू की संपत्तियों और धर्मांतरण के मामलों से जुड़े दस्तावेज इकट्ठा करने शुरू कर दिए।

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अफसरों के बेहद करीब था छांगुर बाबा

स्थानीय प्रशासन और पुलिस थानों में की गई शिकायतों का कोई असर नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार, छांगुर बाबा अफसरों के इतना करीब थे कि कोई भी कार्रवाई करने से कतराता था। आखिरकार बब्बू ने सारे दस्तावेज और सबूत पीएमओ भेज दिए। वहां से कार्रवाई के आदेश आए तो उत्तर प्रदेश की एटीएस और एसटीएफ हरकत में आई। एसटीएफ ने छांगुर और अन्य आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन पेश होने के बजाय सभी ने हाईकोर्ट की शरण ले ली।

हाईकोर्ट ने भी कार्रवाई रोकने से इनकार कर दिया। इसके बाद एसटीएफ ने फिर मुकदमा दर्ज किया, जिसमें धर्मांतरण, धोखाधड़ी और अवैध निर्माण जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। छांगुर गिरोह ने इसके खिलाफ अदालत में अपील भी की, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

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