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फांसी घर विवाद में नया मोड़! केजरीवाल-सिसोदिया पहुंचे हाईकोर्ट, कल आ सकता है बड़ा फैसला

Delhi High Court News: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने 'फांसी घर' विवाद को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

Published by Shubahm Srivastava

Phansi Ghar Controversy: आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ‘फांसी घर’ विवाद से जुड़े मामले में दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति द्वारा जारी किए गए समन को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. न्यायमूर्ति सचिन दत्ता इस याचिका पर कल सुनवाई करेंगे.

‘फांसी घर’ विवाद पर एक नजर

यह मामला 22 अगस्त 2022 का है, जब केजरीवाल और सिसोदिया ने विधानसभा परिसर में ‘फांसी घर’ का उद्घाटन किया था. यह संरचना स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों के बलिदान का प्रतीकात्मक स्मारक बताई गई थी. हालांकि, आठवीं विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए, जिसके बाद विशेषाधिकार समिति ने 9 सितंबर 2025 को दोनों नेताओं को नोटिस जारी किया और 4 नवंबर को पेश होने के लिए कहा.

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आप नेता की याचिका में क्या कुछ?

केजरीवाल और सिसोदिया की याचिका में कहा गया है कि यह मामला तीन साल पुराने एक प्रतीकात्मक ढांचे से जुड़ा है, जिसकी जानकारी पहले से सार्वजनिक थी. उनका कहना है कि विधानसभा परिसर में निर्मित किसी ईंट-पत्थर के ढांचे की डिज़ाइन या जीर्णोद्धार पर समिति की जांच का कोई संवैधानिक या विधायी आधार नहीं है. 

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विधानमंडल की समितियां कानून बनाने, नीतिगत समीक्षा या सार्वजनिक निगरानी के लिए गठित की जाती हैं, न कि ऐसे प्रतीकात्मक स्मारकों की प्रामाणिकता जांचने के लिए.

याचिका में यह भी कहा गया है कि विशेषाधिकार समिति के पास उन ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता परखने का अधिकार नहीं है, जिन्हें पूर्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की स्वीकृति से स्थापित किया गया था. साथ ही, समिति द्वारा जारी नोटिस पर दोनों नेताओं ने 9 सितंबर को जवाब दिया था, लेकिन उनके उत्तरों पर कोई विचार नहीं किया गया.

नोटिसों को रद्द करने के पीछे दी ये दलील

AAP नेताओं ने दलील दी है कि समिति की यह कार्यवाही अधिकार क्षेत्र के अभाव, प्रक्रियागत खामियों और संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में आती है. इसलिए उन्होंने अदालत से इन समन और नोटिसों को रद्द करने की मांग की है.

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Shubahm Srivastava

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