Type 2 Diabetes: टाइप-2 डायबिटीज बनी ‘साइलेंट किलर’, चुपचाप लिवर को कर रही डैमेज; नई स्टडी से बढ़ी चिंता
Type 2 Diabetes: नई स्टडी ने यह साफ कर दिया है कि डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि यह लिवर के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है. बिना लक्षण के भी लिवर डैमेज होना एक बड़ी चिंता है, इसलिए समय-समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है.
Type 2 Diabetes: डायबिटीज के मरीज आमतौर पर अपने ब्लड शुगर लेवल पर ही ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन अब उन्हें एक और बड़े खतरे से सावधान रहने की जरूरत है. नई रिसर्च में सामने आया है कि टाइप-2 डायबिटीज के कई मरीजों में लिवर से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. एसएसजी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज द्वारा की गई स्टडी ने यह संकेत दिया है कि कई मरीजों को बिना किसी लक्षण के लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस का खतरा हो सकता है.
यह रिसर्चद लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित हुई है, जिसमें बताया गया कि टाइप-2 डायबिटीज के हर 4 में से 1 मरीज को लिवर फाइब्रोसिस की समस्या हो सकती है. वहीं हर 20 में से 1 मरीज में लिवर सिरोसिस का खतरा पाया गया, वो भी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के.
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जांच में सामने आई गंभीर सच्चाई
स्टडी में उन मरीजों को शामिल किया गया था जिनमें लिवर बीमारी के कोई बाहरी लक्षण नहीं दिख रहे थे. जब फाइब्रोस्कैन टेस्ट किया गया तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए. कई मरीजों के लिवर में फैट जमा था और कुछ में लिवर टिश्यूज सख्त हो चुके थे, जिसे फाइब्रोसिस की श्रेणी में रखा जाता है.
यह रिसर्च किसी एक शहर तक सीमित नहीं थी. इसमें देशभर के 27 अस्पतालों और क्लीनिकों के डेटा का विश्लेषण किया गया. इसमें मेदांता, सर गंगा राम अस्पताल, PGIMER और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन जैसे बड़े संस्थान शामिल थे. करीब 9000 से ज्यादा मरीजों के डेटा के विश्लेषण में सामने आया कि 26% मरीजों में फाइब्रोसिस के लक्षण थे. इनमें से 14% मरीज एडवांस्ड फाइब्रोसिस की स्थिति में थे, जबकि 5% मरीज सिरोसिस के करीब पहुंच चुके थे.
बिना लक्षण के भी लिवर डैमेज
इस स्टडी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि लिवर डैमेज केवल फैटी लिवर वाले मरीजों तक सीमित नहीं था. जिन मरीजों में लिवर से जुड़ी कोई समस्या सामने नहीं आई थी, उनमें भी करीब 13% लोगों में फाइब्रोसिस पाया गया. इनमें से 4% मरीज सिरोसिस के खतरे में थे. रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज के कारण लिवर में सूजन हो सकती है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है. यह बीमारी सामान्य ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड में आसानी से पकड़ में नहीं आती. जब तक इसके लक्षण जैसे दर्द या पीलिया सामने आते हैं, तब तक लिवर काफी नुकसान झेल चुका होता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों को केवल शुगर कंट्रोल पर ध्यान देने से काम नहीं चलेगा. उन्हें नियमित रूप से लिवर की जांच भी करानी चाहिए. साल में कम से कम एक बार लिवर स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी जा रही है. डॉक्टर्स के मुताबिक, सही खानपान, नियमित एक्सरसाइज और वजन को कंट्रोल में रखना लिवर और डायबिटीज दोनों के जोखिम को कम कर सकता है. समय पर जांच और लाइफस्टाइल में बदलाव से इस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है.