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Seasonal Affective Disorder: क्या बदलता मौसम कर रहा है आपका दिमाग खराब, मनोचिकित्सक ने बताए इसके कारण और लक्षण

Seasonal Affective Disorder:  सर्दियों से गर्मियों की ओर बढ़ते बसंत के मौसम में कई लोगों के मूड और मानसिक स्थिति पर असर पड़ता है. धूप, हार्मोन और जैविक घड़ी में बदलाव के कारण थकान, उदासी और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.

Published by Ranjana Sharma

Seasonal Affective Disorder: सर्दियों से गर्मियों की ओर बढ़ते मौसम में मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है. फरवरी से मार्च के बीच का समय प्रकृति में बड़े बदलाव का दौर होता है. पेड़ों से पुराने पत्ते गिरते हैं और नई कोंपलें आने लगती हैं. इसी तरह कई लोगों के शरीर और दिमाग में भी बदलाव महसूस होता है. इस ट्रांजिशन पीरियड में कुछ लोगों को अचानक थकान, नींद की गड़बड़ी, चिड़चिड़ापन या उदासी जैसी समस्याएं होने लगती हैं. आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर के अनुसार मौसम के इस बदलाव का असर शरीर की जैविक प्रक्रियाओं और हार्मोन संतुलन पर पड़ता है. ऐसी अवस्था को सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर कहा जाता है. 

क्या है सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर?

मौसम के बदलाव से जुड़ी इस स्थिति को विज्ञान की भाषा में सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर कहा जाता है. यह एक प्रकार का अवसाद है जो मौसम बदलने के दौरान देखा जाता है. मनोचिकित्सक दिनेश राठौर ने बताया आमतौर पर यह समस्या तब होती है जब मौसम बदलने के कारण शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित होती है और मूड से जुड़े रसायनों में असंतुलन आ जाता है.

क्यों प्रभावित होता है मूड?

डॉक्टर के अनुसार मौसम बदलने के दौरान धूप, तापमान और दिन-रात के समय में बदलाव आता है. इससे दिमाग में मौजूद सेरोटोनिन का स्तर प्रभावित हो सकता है, जो मूड को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. वहीं नींद से जुड़ा हार्मोन मेलाटोनिन भी बदल सकता है. इसके कारण नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है और व्यक्ति को सुस्ती या थकान महसूस हो सकती है. इसके अलावा शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिद्म भी प्रभावित होती है.

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कैसे पहचानें इसके लक्षण?

मनोचिकित्सक के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को लगातार थकान महसूस हो, ज्यादा नींद आए, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन हो, काम में रुचि कम हो जाए या मीठा और कार्बोहाइड्रेट ज्यादा खाने की इच्छा हो तो ये मौसम से जुड़े मूड बदलाव के संकेत हो सकते हैं. कई बार व्यक्ति सामाजिक गतिविधियों से भी दूरी बनाने लगता है और खुद को अलग-थलग महसूस करता है.

बचाव के लिए क्या करें?

कुछ आसान आदतें अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट धूप में समय बिताना, संतुलित आहार लेना, ताजे फल-सब्जियां और ओमेगा-3 युक्त भोजन करना तथा नियमित व्यायाम करना मूड को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. कई देशों में इसके लिए लाइट थेरेपी का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें विशेष लाइट बॉक्स के जरिए प्राकृतिक धूप जैसा प्रभाव दिया जाता है. अगर उदासी, थकान या नींद की समस्या लंबे समय तक बनी रहे और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे, तो मनोचिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है. समय रहते सही कदम उठाने से इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.

Ranjana Sharma
Published by Ranjana Sharma

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