Eye cancer: कैंसर के इलाज को लेकर दुनियाभर में लगातार नए प्रयोग और शोध हो रहे हैं. इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने एक बेहद अनोखा तरीका सामने रखा है, जिसमें सूअर के स्पर्म से जुड़े तत्वों का इस्तेमाल आंखों के एक खतरनाक कैंसर के इलाज में किया जा सकता है. शुरुआती शोध में यह तरीका प्रभावी और अपेक्षाकृत सुरक्षित बताया जा रहा है, हालांकि अभी इसे इंसानों पर आजमाया जाना बाकी है.
क्या है बीमारी और क्यों है खतरनाक?
सूअर के स्पर्म से क्या मिला नया रास्ता?
कैसे तैयार किया गया आई ड्रॉप?
- शोधकर्ताओं ने इन एक्सोसोम को फोलिक एसिड और एक खास नैनोजाइम सिस्टम के साथ मिलाकर आई ड्रॉप तैयार किया.
- फोलिक एसिड ट्यूमर कोशिकाओं को पहचानने में मदद करता है
- नैनोजाइम सिस्टम कैंसर सेल्स को खत्म करने में एक्टिव होता है
- एक्सोसोम दवा को आंख के अंदर तक पहुंचाने का रास्ता बनाते हैं
आंख के अंदर कैसे पहुंचती है दवा?
- यह आई ड्रॉप आंख की दो अहम परतों-कॉर्निया और कंजंक्टिवा-के जरिए अंदर प्रवेश कर सकती है.
- एक्सोसोम अस्थायी रूप से आंख की सुरक्षा परत को खोल देते हैं, जिससे दवा सीधे ट्यूमर तक पहुंच सके और असर दिखा सके.
अभी कहां तक पहुंचा है शोध?
यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसका परीक्षण फिलहाल चूहों पर किया गया है. नतीजे सकारात्मक बताए जा रहे हैं, लेकिन इंसानों पर ट्रायल से पहले और कई चरणों की जांच जरूरी है. फिलहाल इसे पूरी तरह सुरक्षित या इलाज का पक्का विकल्प नहीं कहा जा सकता. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह भविष्य में एक कम दर्दनाक और ज्यादा टारगेटेड इलाज बन सकता है. अगर यह तकनीक सफल होती है, तो न सिर्फ रेटिनोब्लास्टोमा बल्कि अन्य बीमारियों के इलाज के लिए भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं. खासकर बच्चों में होने वाले कैंसर के इलाज को यह आसान और कम जोखिम भरा बना सकता है.

