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क्या आप भी लेते हैं नाक की बजाय मुंह से सांस तो हो जाए सावधान! सेहत पर पड़ सकता है ये खतरनाक असर?

Mouth Breathing: अगर आप भी नाक की बजाय मुंह से सांस लेते है तो इस खबर को सबसे पहले पढ़ लिजिए, और जानें कि मुंह से सास लेने का सेहत पर क्या असर पड़ता है.

Published by Shristi S
Health Effects of Mouth Breathing: कई बार सुबह उठते समय हमें लगता है कि मुंह बहुत सूखा हुआ है या तकिए पर लार के निशान पड़े हैं. यह संकेत हो सकता है कि हम रात में नाक की बजाय मुंह से सांस ले रहे थे. सुनने में यह बात मामूली लगती है, लेकिन अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर पर गहरा असर डाल सकती है. सामान्य रूप से हमारा शरीर नाक से सांस लेने के लिए बना है. नाक हवा को साफ, नम और गर्म बनाकर फेफड़ों तक पहुंचाती है, जिससे हमें बेहतर ऑक्सीजन मिलती है. लेकिन जब नाक से सांस लेने में दिक्कत होती है, तो शरीर स्वाभाविक रूप से मुंह के रास्ते सांस लेना शुरू कर देता है. आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इसके क्या नुकसान हैं.

लोग नाक की बजाय मुंह से सांस क्यों लेते हैं?

1. नाक बंद होना- सर्दी-जुकाम, एलर्जी या साइनस जैसी समस्याओं के कारण नाक बंद हो जाती है. ऐसे में नाक से सांस लेना मुश्किल हो जाता है और शरीर मजबूरी में मुंह से सांस लेना शुरू कर देता है.

2. एडेनोइड्स या टॉन्सिल्स का बढ़ना- बच्चों में अक्सर एडेनोइड्स या टॉन्सिल्स बढ़ जाते हैं, जिससे नाक का रास्ता ब्लॉक हो जाता है. इस कारण बच्चे अक्सर मुंह खोलकर सांस लेते हैं.

3. नाक की संरचना में गड़बड़ी- अगर किसी व्यक्ति की नाक का सेप्टम टेढ़ा है या नाक में पॉलीप्स हैं, तो हवा के प्रवाह में रुकावट आती है. इस वजह से भी मुंह से सांस लेना आसान लगने लगता है.

4. चेहरे या जबड़े की बनावट- कुछ लोगों के चेहरे या जबड़े की बनावट ऐसी होती है कि उनका मुंह थोड़ा खुला रहता है, जिससे वे नाक की बजाय मुंह से सांस लेने की आदत डाल लेते हैं.

5. आदत या व्यवहार- बचपन में अंगूठा चूसने या हमेशा मुंह खुला रखने की आदत भी बाद में मुंह से सांस लेने की समस्या का कारण बन जाती है.

6. स्लीप एपनिया- यह एक नींद से जुड़ा विकार है जिसमें नींद के दौरान सांस रुक-रुककर चलती है. इस दौरान शरीर स्वतः मुंह से सांस लेना शुरू कर देता है.

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मुंह से सांस लेने के नुकसान

1. मुंह का सूखापन और बदबूदार सांस- मुंह से सांस लेने पर लार सूख जाती है, जिससे मुंह में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं. इसका नतीजा होता है बदबूदार सांस और लगातार सूखा हुआ मुंह.

2. दांतों और मसूड़ों की समस्याएं- लार में मौजूद खनिज दांतों को मजबूत रखते हैं. मुंह सूखने से दांतों में कैविटी और मसूड़ों में सूजन हो सकती है, जो आगे चलकर दांतों के कमजोर होने का कारण बनती है.

3. नींद की गुणवत्ता पर असर- मुंह से सांस लेने से नींद की गुणवत्ता घट जाती है. कई बार इससे स्लीप एपनिया जैसी गंभीर स्थिति बन जाती है, जिसमें दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती. इसके परिणामस्वरूप दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी महसूस होती है.

4. बच्चों की ग्रोथ पर असर- अगर बच्चे लगातार मुंह से सांस लेते हैं, तो उनके चेहरे की हड्डियों की संरचना प्रभावित हो सकती है. चेहरा लंबा और जबड़ा पतला हो जाता है. दांत टेढ़े-मेढ़े निकल सकते हैं और आगे चलकर ब्रेसेस की जरूरत पड़ सकती है.

5. दिमाग पर असर और थकान- मुंह से सांस लेने पर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, जिससे दिमाग की कार्यक्षमता घटती है. व्यक्ति को थकान, सुस्ती और मानसिक धुंधलापन (ब्रेन फॉग) महसूस होता है.

क्या करें समाधान के लिए?

नाक से सांस लेने की आदत वापस लाने के लिए सबसे पहले उसकी रुकावट का कारण जानना जरूरी है. अगर नाक बंद रहती है तो डॉक्टर से परामर्श लेकर एलर्जी, साइनस या टॉन्सिल की जांच करवाएं. सही सोने की मुद्रा अपनाएं और सोने से पहले नाक साफ रखें. बच्चों में यह आदत जल्दी पहचानना और ठीक करना बेहद जरूरी है.

Shristi S
Published by Shristi S

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