Silver In New Age Technology: सिल्वर अपनी अनोखी इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, रिफ्लेक्टिविटी और ड्यूरेबिलिटी के कारण नई उम्र की टेक्नोलॉजी के विकास की रीढ़ बन गया है, जिससे यह सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G और IoT जैसे क्षेत्रों में बहुत ज़रूरी हो गया है. इससे इंडस्ट्रियल डिमांड में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह ग्लोबल टेक्नोलॉजिकल और ग्रीन ट्रांज़िशन के लिए एक ज़रूरी स्ट्रेटेजिक मेटल बन गया है.
सिल्वर: नई टेक्नोलॉजी के लिए एक मजबूत नींव
आज की मॉडर्न दुनिया में, सिल्वर अब सिर्फ़ ज्वेलरी या सिक्कों तक ही सीमित नहीं है. यह नई उम्र की टेक्नोलॉजी में एक ज़रूरी मेटल बन गया है. सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में सिल्वर की भूमिका तेज़ी से बढ़ रही है. इसका सबसे बड़ा कारण बिजली को बहुत कुशलता से और कम से कम नुकसान के साथ कंडक्ट करने की इसकी अनोखी क्षमता है.
सोलर एनर्जी में सिल्वर की अहम भूमिका
सोलर पैनल में सिल्वर पेस्ट का इस्तेमाल होता है. यह पेस्ट सूरज की रोशनी से बनने वाले इलेक्ट्रॉनों को आसानी से कंडक्ट करता है, जिससे ज़्यादा बिजली बनती है और एनर्जी का नुकसान कम होता है. औसतन, एक सिंगल सोलर पैनल में 15 से 20 ग्राम सिल्वर का इस्तेमाल होता है. जैसे-जैसे दुनिया रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ रही है, सिल्वर की डिमांड भी बढ़ रही है. अनुमान है कि 2030 तक, ग्लोबल सोलर एनर्जी कैपेसिटी में लगभग 170% की बढ़ोतरी होगी, जिससे सिल्वर का इस्तेमाल और भी बढ़ जाएगा.
इलेक्ट्रिक व्हीकल में सिल्वर का इस्तेमाल
एक औसत इलेक्ट्रिक व्हीकल में 25 ग्राम तक सिल्वर का इस्तेमाल होता है. इस सिल्वर का इस्तेमाल बैटरी, वायरिंग, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, कंट्रोल यूनिट और चार्जिंग सिस्टम में होता है. जैसे-जैसे EV पेट्रोल और डीज़ल गाड़ियों की जगह ले रहे हैं, सिल्वर की डिमांड भी बढ़ रही है. अकेले अमेरिका में, 2030 तक लगभग 28 मिलियन EV चार्जिंग पोर्ट लगाने की योजना है. इन चार्जिंग स्टेशनों में भी काफी मात्रा में सिल्वर की ज़रूरत होगी.