Purple Earth Hypothesis: जब वॉयेजर 1 हमारे सोलर सिस्टम से बाहर जा रहा था, तो उसकी टीम ने उससे आखिरी बार पृथ्वी को देखने के लिए कहा. 14 फरवरी, 1990 को, सूरज से लगभग 3.7 बिलियन मील दूर, स्पेस प्रोब ने एक तस्वीर खींची, जो अब “पेल ब्लू डॉट” के नाम से मशहूर है. जी हां, बस एक ‘नीला बिंदु’ क्योंकि अगर हम अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखें, तो यह ग्रह बिखरे हुए सफेद बादलों और हरे रंग के धब्बों के साथ नीला दिखाई देता है. लेकिन 2.4 बिलियन साल पहले यह बहुत अलग दिखता होगा. चलिए जान लेते हैं कि कैसे?
बैंगनी रंग की थी पृथ्वी?
वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्पल अर्थ हाइपोथिसिस के अनुसार, पृथ्वी पर शुरुआती जीवन हरे पौधों पर आधारित नहीं था. आज, ज़्यादातर जीव क्लोरोफिल नाम के पिगमेंट का इस्तेमाल करके फोटोसिंथेसिस करते हैं, यही वजह है कि अंतरिक्ष से पृथ्वी हरी और नीली दिखती है. लेकिन, वैज्ञानिकों का सुझाव है कि शुरुआती जीवन रेटिनल नाम के मॉलिक्यूल का इस्तेमाल करता था, जो शायद क्लोरोफिल से भी पहले विकसित हुआ था. रेटिनल हरी और पीली रोशनी को सोखता है जबकि लाल और नीली रोशनी को रिफ्लेक्ट करता है, जिससे पृथ्वी बैंगनी दिखती होगी. यह थ्योरी मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शिलादित्य दाससरमा और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, रिवरसाइड के एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. एडवर्ड श्विटरमैन ने दी थी.
पुराने सेडिमेंट्स में पाए जाने वाले आर्कियल मेम्ब्रेन के कॉम्पोनेंट्स इस बात का समर्थन करते हैं कि शुरुआती जीवन रेटिनल-बेस्ड था. साथ ही, यह क्लोरोफिल से एक सरल मॉलिक्यूल है, जो इसे शुरुआती जीवन के लिए ज़्यादा संभावित उम्मीदवार बनाता है. एस्ट्रोबायोलॉजी मैगज़ीन द्वारा पब्लिश एक पुराने आर्टिकल में दासशर्मा ने कहा, “रेटिनल-बेस्ड फोटोट्रोफिक मेटाबॉलिज्म अभी भी पूरी दुनिया में, खासकर महासागरों में आम हैं, और पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण बायोएनर्जेटिक प्रक्रियाओं में से एक का प्रतिनिधित्व करते हैं.”
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पहले ऑक्सीजन की भी थी कमी
NASA की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हमारे ग्रह के इतिहास के शुरुआती सालों में (लगभग पहले दो अरब साल), पृथ्वी के एटमॉस्फियर में ज़्यादा मात्रा में ऑक्सीजन नहीं थी, क्योंकि इसमें कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन ज़्यादा थी. हालांकि, लगभग 2.4 अरब साल पहले कुछ बदला, जब ग्रेट ऑक्सीजनेशन इवेंट ने एटमॉस्फियर में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ा दिया.
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