बिहार की ये दो फिल्में नेशनल अवार्ड के काबिल, फिर भी एक को ही क्यों मिला खिताब, जानें शूल की खासियत

Bihar National Award Film: बिहार के अपराध पर बनी ये दो फिल्में शूल और गंगाजल, लेकिन इनमे से सिर्फ एक को ही क्यों मिला नेशनल अवॉर्ड, जानें क्या है इसकी वजह-

Published by sanskritij jaipuria

Bihar National Award Film: बिहार, अपने इतिहास, संस्कृति और सामाजिक स्ट्रगलों के लिए जाना जाता है. यहां की जिंदगी, उसकी कठिनाइयां और लोककथाएं अक्सर सिनेमा का हिस्सा बनी हैं. लेकिन हर फिल्म अपने प्रयास के बावजूद समान पहचान नहीं पा पाती. इसी संदर्भ में हम दो चर्चित फिल्मों- ‘शूल’ और ‘गंगाजल’ की तुलना करेंगे, जो दोनों बिहार की कहानियों पर आधारित हैं, लेकिन केवल एक को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला.

बिहार की कहानी पर आधारित दो फिल्में

शूल और गंगाजल दोनों ही अपराध और भ्रष्टाचार की गहरी कहानी दिखाती हैं.

शूल (1999) में बिहार के राजनैतिक भ्रष्टाचार और अपराध जगत की वास्तविकता दिखाई गई है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे सिस्टम और राजनीतिक ताकतें आम आदमी की जिंदगी को प्रभावित करती हैं.

गंगाजल (2003) भी अपराध और पुलिस व्यवस्था पर आधारित है, लेकिन इसमें कहानी में ज्यादा ड्रामाई और बॉलीवुड स्टाइल का तड़का है.

दोनों फिल्में बिहार के समाज और राजनीति पर एक आईना रखती हैं, लेकिन उनके दर्शाने का तरीका अलग है.

Related Post

शूल बनाम गंगाजल

शूल को उसके सच्चाई के नजरों और सख्त सामाजिक संदेश के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. फिल्म ने दिखाया कि कैसे अपराध और भ्रष्टाचार आम आदमी को दबा सकते हैं, और इसे बिना किसी बड़े ग्लैमर के पेश किया गया.

गंगाजल, हालांकि दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुई और बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, पर राष्ट्रीय पुरस्कार से नहीं जुड़ पाई. इसका कारण शायद यह था कि फिल्म ने कहानी में थ्रिलर और मनोरंजन के तत्व अधिक डाले, जबकि सामाजिक यथार्थ को उतनी गंभीरता से नहीं दिखाया गया.

क्यों सच्चाई बनाती है अंतर

राष्ट्रीय पुरस्कार अक्सर कला और सामाजिक संदेश के लिए दिया जाता है. शूल ने ये साबित किया कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि समाज की सच्चाई को सामने लाने का माध्यम भी हो सकता है.

गंगाजल ने बिहार की कहानियों को मनोरंजक तरीके से पेश किया, लेकिन उसे वो गंभीरता और सजीवता नहीं मिली, जो शूल में थी. दोनों फिल्में बिहार की धरती से जुड़ी हैं और दोनों ने अपराध, भ्रष्टाचार और सामाजिक जटिलताओं को दिखाया. लेकिन केवल शूल ने राष्ट्रीय लेवल पर सम्मान पाया. ये हमें सिखाता है कि कहानी की सच्चाई और गहराई ही सिनेमा में स्थायी पहचान बनाने में मदद करती है.
 

sanskritij jaipuria

Recent Posts

Jio Cheapest 5G Plan: जियो ने लॉन्च किया सबसे सस्ता प्लान, नोट करें प्राइस, बेनेफिट समेत अन्य डिटेल्स

Jio Cheapest 5G Plan with Netflix: जियो ने सबको चौंकाते हुए अपने उपभोक्ताओं के लिए…

January 20, 2026

Panchak 2026: आज रात से पंचक शुरू जानें कब तक रहेंगे पंचक, इन कामों से रहें दूर वरना हो सकता है नुकसान

Panchak 2026: हिंदू धर्म में पंचक को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. पंचक का नाम…

January 20, 2026

भोजपुरी गाने पर अश्लीलता! देवरिया के छात्रों ने फ्रेशर पार्टी में की हद पार, डांस का Viral Video

Bhojpuri Dance Video: सोशल मीडिया पर हर रोज कई  ऐसी वीडियो वायरल होती हैं जिनपर…

January 20, 2026