Rishab Rikhiram Sharma Fires Back at Anoushka Shankar : ऋषभ रिखीराम शर्मा सितार वादक के तौर पर दुनियाभर में मशहूर हैं. वह खुद को सितार वादक पंडित रविशंकर के सबसे छोटे और आखिरी शिष्य मानते हैं. हालांकि, दिवंगत सितार प्लेयर की बेटी अनुष्का शंकर ने उनके इस दावे को ठुकरा दिया है. इसे लेकर उन्होंने एक ऑफिशियल बयान तक जारी कर दिया है. म्यूज़िक प्रोड्यूसर ऋषभ रिखीराम शर्मा ने संगीत की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. वह व्हाइट हाउस में सोलो सेट परफ़ॉर्म और पहले सितार बजाने के लिए जाने जाते हैं. वह क्लासिकल परंपरा को दिखाते हैं.
ऋषभ रिखीराम शर्मा नहीं थे रविशंकर के शिष्य
ऋषभ रिखीराम शर्मा ने हमेशा इंटरव्यू में कहा है कि रविशंकर के साथ बातचीत ने उनके लिए म्यूजिक की दुनिया में रास्ता बनाया. हालांकि, अनुष्का ने साफ किया कि वह कभी भी उनके पिता के शिष्य नहीं थे. उन्होंने कहा कि भले ही वह काफी टैलेंटेड हैं. लेकिन उन्होंने रवि शंकर के साथ कुछ ही इनफॉर्मल क्लास लीं और मुख्य रूप से उस्ताद के सीनियर शिष्यों में से एक परिमल सदाफल से ही उन्होंने अधिकतर ट्रेनिंग ली थी.
ऋषभ रिखीराम शर्मा का बयान
ऋषभ रिखीराम शर्मा ने अपने बयान में कहा कि -पंडित रवि शंकर ने 2012 में खुद पर्सनली अपने टैलेंट को परखा था. उन्होंने उन्हें डिटेल में क्लास दी थी और ट्रेडिशनल गंडा बंधन सेरेमनी के जरिए उन्हें शिष्य के तौर पर ऑफिशियली स्वीकार किया था. उन्होंने आगे कहा कि- उस्ताद ने बाद में एक कॉन्सर्ट के दौरान उन्हें सबसे छोटे शिष्य के तौर पर इंट्रोड्यूस कराया था. जिसे वह टीचर-स्टूडेंट के रिश्ते का सबूत मानते हैं. साथ ही ऋषभ ने यह भी कहा कि रवि शंकर की मौत के बाद उनकी आगे की ट्रेनिंग सीनियर शिष्य पंडित परिमल सदाफल संग जारी रही थी.
बता दें कि, 10 फरवरी 2012 को जय रिखी राम वाद्य परंपरा इवेंट में पंडित रविशंकर ने सुकन्या शंकर, शर्मा परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में 13 साल के ऋषभ रिखीराम शर्मा को अपने सबसे छोटे शिष्य बताया, वह पंडितजी की भारत में आखिरी पब्लिक अपीयरेंस थी. दिसंबर 2012 में पंडित रविशंकर के गुज़र जाने के बाद, ऋषभ को सुकन्या शंकर ने 10 मार्च 2013 को नेहरू पार्क में उस्ताद की मेमोरियल गैदरिंग में भी इनवाइट किया था.
क्या बोलीं अनुष्का शर्मा?
अनुष्का ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे को बताया कि – ऋषभ सच में टैलेंटेड काफी है. मुझे लगता है कि उसके गुरु होने को लेकर कुछ गलतफहमी है. उसने मेरे पिता के सीनियर शिष्यों में से एक परिमल सदाफल से शिक्षा ली है. मेरे पिता के साथ उसने केवल कुछ लेसन लिए थे. वह भी बहुत इनफॉर्मली, जिसमें परिमल अंकल भी कमरे में थे. हम उसे बचपन से जानते थे, क्योंकि वह हमारे इंस्ट्रमेंट बनाने वाले संजय रिकिराम शर्मा का बेटा था. तो यह उनके आखिरी शिष्य या सबसे छोटे शिष्य होने की आखिर कहां से बन गई, जो बिल्कुल भी सच नहीं है. लेकिन वह सुपर टैलेंटेड हैं. वह हर सफलता के हकदार है, लेकिन इस कहानी के बिना.

