Dhruv Rathee on Dhurandhar 2: ध्रुव राठी आए दिन किसी न किसी विवाद के चलते चर्चा में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है और ये वीडियो सिनेमाघरों में बवाल मचाने वाली फिल्म ‘धुरंधर 2’ पर है. ध्रुव ने अपने वीडियो में कहा है कि ये फिल्म मनोरंजन के लिए नहीं बनाई गई है, ये भाजपा का सबसे महंगा एडवरटाइजमेंट है. उन्होंने आगे ये तक कह दिया की इस फिल्म से इतिहास बदलने की कोशिश की जा रही है.
ध्रुव राठी ने शेयर किया वीडियो
ध्रुव राठी ने अपना एक वीडियो शेयर किया है और उसमें वो कह रहे हैं कि अक्सर लोग एड को स्किप कर देते हैं, लेकिन भाजपा के एड के लिए आप 500 रुपये दे रहे हैं और फिल्म देख रहे हैं और ये चीज मैं नहीं ये तो भाजपा के चीफ मिनिस्टर बोल रहे हैं. असम के सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा है कि जो लोग धुरंधर देख रहे हैं वो भाजपा को वोट देंगे.
देश के इतिहास को नया रंग देने की कोशिश
ध्रुव राठी ने कहा, “भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल खुद इस फिल्म के गानों का इस्तेमाल मोदी के प्रचार मटेरियल के रूप में कर रहे हैं. अगर बात केवल इतनी ही होती तो ठीक था, लेकिन इस फिल्म में इतने झूठ और गलत दावे हैं कि ऐसा लगता है जैसे इसके माध्यम से देश के इतिहास को बदलने की कोशिश की जा रही हो. इसे बड़े पैमाने पर लोगों के दिमागों पर असर डालने का माध्यम बनाने की कोशिश की जा रही है.”
डिस्क्लेमर के पीछे की कहानी
ध्रुव राठी ने आगे कहा, “अच्छा किसी भी एडवरटाइजमेंट में दोस्तों, एक डिस्क्लेमर जरूर होता है. ‘धुरंधर’ में भी यही है…फिल्म की शुरुआत में लिखा गया है कि ये एक फिक्शनल वर्क है और रियल इवेंट्स से प्रेरित है. इसके आगे लिखा है कि किसी भी किरदार की असली जिंदगी में मौजूद किसी व्यक्ति से कोई समानता केवल संयोग है. यानी, अगर फिल्म में किसी भी पात्र का रूप, नाम या संवाद किसी असली व्यक्ति से मिलता-जुलता लगे, तो वो पूरी तरह से एक संयोग है.”
लोगों को गुमराह किया जा रहा-ध्रुव राठी
यूट्यूबर ने आगे कहा कि पहले तो आप लोगों को नरेंद्र मोदी का असली फुटेज दिखाओ फिर दाऊद इब्राहिम और बाकी लोगों का नाम भी यूज कर लो और फिर कह दो कि ये संयोग है. अगर असलियत की बात करें तो ये डिस्क्लेमर के चलते लोगों को गुमराह कर रहे हैं. आदित्य धर ने वॉट्सएप फॉरवड्स से एक पूरी फिल्म बना दी है.
इसी वीडियो में आगे ध्रुव राठी नोट बंदी की भी बाते कही हैं. उन्होंने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से सवाल किया कि क्या ऐसी फिल्म बनाना सही है, जो किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल को देश-विरोधी रूप में पेश करे? जिसमें किसी विशेष नेता को बढ़ावा देने के लिए सच और झूठ को मिलाकर कहानी बनाई जाए? यदि इसे अनुमति मिलती है, तो आने वाले समय में कई लोग इसी तंत्र का इस्तेमाल करके उसी दल के खिलाफ फिल्में बनाने की कोशिश कर सकते हैं.

