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MBBS के लिए NEET में कितने मार्क्स चाहिए? कैटेगरी वाइस यहां जाने सारी डिटेल्स

NEET Marks For MBBS: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) हर साल न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक प्रतिशत के आधार पर तय करती है. सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए यह कट-ऑफ लगभग 50 पर्सेंटाइल रहती है.

Published by Shubahm Srivastava

NEET 2026 Cutoff: NEET परीक्षा में MBBS में दाखिला पाने के लिए सिर्फ़ क्वालिफाई करना काफी नहीं है, बल्कि अच्छे खासे अंक भी जरूरी होते हैं. NEET 2026 के कटऑफ अभी जारी नहीं हुए हैं. राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) हर साल न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक प्रतिशत के आधार पर तय करती है. सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए यह कट-ऑफ लगभग 50 पर्सेंटाइल रहती है, जिसका अर्थ है कि उम्मीदवार को कुल 720 में से लगभग 144 या उससे अधिक अंक लाने होते हैं. 

वहीं OBC, SC और ST श्रेणी में क्वालिफाइंग मानक 40 पर्सेंटाइल होता है, जो पिछले वर्षों के अनुसार लगभग 113 अंक या उससे अधिक पर आकर रुकता है. हालांकि, ये अंक बस उम्मीदवार को रैंक सूची में शामिल करते हैं—MBBS सीट दिलाने के लिए नहीं.

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने की प्रतिस्पर्धा

असल चुनौती क्वालिफाई करने के बाद शुरू होती है, क्योंकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए प्रतियोगिता काफी कड़ी है. सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को ऑल इंडिया या प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट पाने के लिए 550 से 680+ अंक के बीच स्कोर लाना पड़ सकता है. 

राज्य कोटे के तहत कुछ कॉलेजों में यह सीमा थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन सुरक्षित क्षेत्र आम तौर पर 570–600+ माना जाता है. OBC/EWS उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ थोड़ी कम रहती है और अधिकांश मामलों में 520–610 अंक के करीब स्कोर पर MBBS सीट मिल सकती है.

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इन सब चीजों पर निर्भर करता है कट-ऑफ

SC और ST श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण के कारण कट-ऑफ सामान्यतः कम दिखती है. इन श्रेणियों में कई राज्यों में 450 से 550 अंक के बीच अंक लाने वाले छात्रों को सरकारी मेडिकल सीट के अवसर मिल जाते हैं. हालांकि यह पूरी तरह परीक्षा के स्तर, सीटों की उपलब्धता और उस वर्ष मिलने वाली उच्च संख्या के स्कोर पर निर्भर करता है.

हर साल बदलती है कट-ऑफ लिस्ट

कट-ऑफ हर साल इसलिए बदलती है क्योंकि सवालों की कठिनाई, कुल परीक्षार्थियों की संख्या, और उपलब्ध MBBS सीटों की संख्या हर बार अलग होती है. यदि पेपर आसान होता है तो कट-ऑफ बढ़ जाती है, जबकि कठिन वर्ष में कमी देखने को मिलती है. सार यह है कि NEET में केवल न्यूनतम क्वालिफाई अंक लाना लक्ष्य नहीं होना चाहिए—MBBS सीट पाने के लिए विद्यार्थियों को अपनी श्रेणी के हिसाब से उच्च लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए.

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