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मयंक सोनी की सफलता ने मचाया शोर, देश की सबसे कठिन परीक्षा में AIR 26 रैंक किया हासिल

मयंक सोनी (Mayank Soni Success) की सफलता यह साबित करती है कि कठोर अनुशासन (Strict Discipline ) और बेहतरीन रणनीति (Excellence Strategy) किसी भी कठिन परीक्षा (Tough Exam) को आसानी से क्रैक कर सकती है.

Published by DARSHNA DEEP

Mayank Soni Cracks JEE with AIR 26: मयंक सोनी ने आज हर उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो अक्सर अपने हालातों को लेकर रोते रहते हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर आप अपने जीवन में एक बार ठान लें कि आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचना है तो फिर चाह कितना भी कठिन क्यों न हो आपकी परीक्षा आप उससे  कठोर अनुशासन के साथ-साथ बेहतरीन रणनीति से आसानी से क्रैक कर सकते हैं. 

जेईई की परीक्षा में AIR 26 रैंक किया हासिल

मयंक सोनी ने जेईई की परीक्षा में AIR 26 रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने माता-पिता का सिना चौड़ा किया है बल्कि JEE जैसे कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हर उन छात्रों के लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत बनकर आगे आए हैं. मयंक सोनी के पिता मुख्य रूप से एक सरकारी कर्मचारी हैं. उन्होंने बताया कि घर में एक ऐसा वातावरण तैयार किया जहां, समय की पाबंदी और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी गई.

मयंक के व्यवहार में देखने को मिला पिता का गुण

उनके पिता ने जानकारी देते हुए बताया कि एक सरकारी कर्मचारी के जीवन में ‘नियम’ और ‘समय’ का बहुत ज्यादा ही महत्वपूर्ण रखता है, और यही गुण मयंक के व्यवहार में भी उनके पिता को देखने को मिला. इसके अलावा मयंक का मानना है कि घर पर अनुशासन का मतलब सिर्फ घंटों तक किताब लेकर बैठना नहीं है होता, बल्कि एक तय समय पर जागना, घर का खाना करना और अपने दैनिक लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करना ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रखता है. 

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मयंक सोनी की सफलता की असली वजह

कोचिंग के अलावा मयंक Self-Study पर खास तौर से ध्यान दिया करते थे. मयंक रोजाना  6-8 घंटे पढ़ाई करते थे. उनका मानना है कि जब तक आप स्वयं समस्याओं को हल नहीं कर पाएंगे, तब तक आपके अवधारणाएं (Concepts) साफ नहीं हो पाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने आगे बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान मयंक ने सोशल मीडिया और स्मार्टफोन से पूरी तरह से दूरी बना ली. उन्होंने सिर्फ और सिर्फ मॉक टेस्ट देने के लिए ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया. 

अपनी गलतियों से सीखकर आगे बढ़े मयंक

उन्होंने  इस बात का खास तौर से जिक्र करते हुए कहा कि हर एक मॉक टेस्ट के बाद वह विश्लेषण करते थे कि उनकी गलतियां कहां हुई है. उनका मानना है कि इंसान अपनी गलतियों से सीखर ही आगे बढ़ पाता है.  अक्सर यह माना जाता है कि बड़ी रैंक के लिए ज्यादा महंगे संसाधनों की आवश्यकता होती है, लेकिन मयंक ने यह साबित किया कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधनों और घर के शांत माहौल में भी इतिहास रचा जा सकता है. तो वहीं,  उनके पिता का अटूट विश्वास और घर की सादगी ने उन्हें मानसिक रूप से स्थिर रहने में बेहद ही मदद की है. 

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