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What is AQI: दिल्ली को हो रहा हर दिन 100 करोड़ का नुकसान, हर साल जा रही 12,000 लोगों की जान

दिल्ली और एनसीआर में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुँच चुकी है. कई इलाकों में AQI 400 के पार दर्ज किया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है. जानिए AQI क्या है, इसे कैसे मापा जाता है?

Published by Shivani Singh

दिल्ली और एनसीआर के साथ-साथ उत्तर भारत में भी स्मॉग का स्तर खतरनाक हो गया है. दिल्ली में कई जगहों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के पार चला गया है. आज 10 नवंबर को भी दिल्ली और एनसीआर के लगभग सभी इलाकों में AQI 400 या उससे ऊपर पहुँच है. जो कि बेहद खतरनाक स्थिति है. अगर यही स्थिति कई दिनों तक बनी रही, तो बड़ी संख्या में लोग बीमारी का शिकार हो सकते हैं. अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिर ये AQI क्या है? AQI को लेकर दिल्लीवासियों में इतना बवाल क्यों है? लोग वायु गुणवत्ता को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. दिल्ली सरकार यहां बिहार चुनाव के प्रचार में व्यस्त दिखाई दे रही है. ऐसे में आइये आपको बताते हैं कि आखिर ये वायु गुणवत्ता सूचकांक क्या है और इसका वायु की गुणवत्ता से क्या वास्ता है.

AQI क्या है और यह कैसे काम करता है?

AQI, या हिंदी में वायु गुणवत्ता सूचकांक, वायु गुणवत्ता मापने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अंक है. यह भविष्य के वायु प्रदूषण का भी अनुमान देता है.

AQI की उत्पत्ति कैसे हुई?

AQI अब दुनिया के हर देश में मापा जा रहा है. हालाँकि, इसकी विधि जगह-जगह अलग-अलग होती है. भारत में, AQI की शुरुआत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा की गई थी.

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AQI को कितनी श्रेणियों में विभाजित किया गया है?

देश में AQI को उसके स्तर और रीडिंग के आधार पर छह श्रेणियों में विभाजित किया गया है. 

  • 0-50 के बीच का AQI अच्छी वायु गुणवत्ता दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि हवा साफ़ है.
  • 51-100 के बीच का AQI संतोषजनक वायु गुणवत्ता दर्शाता है.
  • 101-200 के बीच का AQI मध्यम वायु गुणवत्ता दर्शाता है.
  • 201-300 के बीच का AQI खराब वायु गुणवत्ता दर्शाता है.
  • 301-400 के बीच का AQI बहुत खराब वायु गुणवत्ता दर्शाता है.
  • 401 और 500 के बीच का AQI गंभीर वायु गुणवत्ता का संकेत देता है.

‘साँस लेना मुश्किल, व्यापार करना और भी मुश्किल’

बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुँच गई है। टीवी, अखबारों और सोशल मीडिया के ज़रिए प्रदूषण के ख़तरों से हर कोई वाकिफ़ है। लोग अब बाज़ारों से परहेज़ कर रहे हैं। जहाँ पहले एनसीआर से रोज़ाना तीन से चार लाख लोग खरीदारी के लिए दिल्ली आते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग एक लाख रह गई है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के खुदरा व्यापार को हर दिन लगभग ₹100 करोड़ का नुकसान हो रहा है। शादियों का सीज़न अपने चरम पर है, लेकिन लोग घरों से निकलने से डर रहे हैं। साँस की समस्या वाले लोग बिल्कुल भी बाहर जाने से बच रहे हैं।

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Shivani Singh

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