बिहार में प्रशांत किशोर की निकल गई हवा, यहां जानें- जनसुराज की हार की 5 बड़ी वजह

Prashant Kishor: बिहार विधानसभा चुनाव में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज शून्य पर आउट हो गई है. एक भी सीट जीत नहीं पाई है.

Published by Sohail Rahman

Bihar Election Results 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अब नतीजे लगभग क्लियर हो चुके हैं. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भले ही अपने लिए कोई रणनीति नहीं बना पाए हों. वह अक्सर कई राज्यों को मुख्यमंत्री देने का दावा करते हैं, लेकिन जब उनकी बारी आई, तो उनकी गणनाएं धरी की धरी रह गईं. अपने ही राज्य बिहार में वे नाकाम रहे. उनकी पार्टी जन सुराज ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन किया. ऐसे में आज हम उन 5 कारणों पर चर्चा करेंगे जिसकी वजह से प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज को करारी हार मिली है.

किन कारणों से प्रशांत किशोर की पार्टी को मिली हार?

प्रशांत किशोर की पार्टी की हार के कई कारण हैं. राजनीतिक विशेषज्ञ इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं. जातिगत समीकरणों से लेकर उम्मीदवार चयन तक सभी को गलतियां बताया जा रहा है. राजनीति में हार-जीत तो लगी रहती है. इसको लेकर राजनीतिक विश्लेषक डॉ. शोभित सुमन का मानना ​​है कि इस विधानसभा चुनाव में जन सुराज मुख्य उम्मीदवार था. इस चुनाव में इसे तीसरा मोर्चा माना जा रहा था क्योंकि चुनाव के शुरुआती दौर में प्रशांत किशोर ने जिन मुद्दों को उठाया, वे सीधे जनता से जुड़े थे.

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हार की सबसे बड़ी वजह क्या रही?

जन सुराज की हार का सबसे बड़ा कारण यह है कि इसकी पूरी चुनावी रणनीति सोशल मीडिया और युवाओं पर आधारित थी. बिहार में पार्टी की ज़मीनी स्तर पर मज़बूत पकड़ नहीं थी. इस बारे में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के पास बूथ प्रबंधन के लिए बीएलए भी नहीं थे. स्थानीय स्तर पर भी जिन लोगों को टिकट देने का वादा किया गया था, उन्हें अपने संसाधन खर्च करने के बावजूद टिकट नहीं दिए गए, जिससे उनमें नाराजगी थी. नतीजतन, उनका पूरा चुनाव वेतनभोगी कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया के सहारे लड़ा गया.

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?

इसके अलावा, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शुरुआत में प्रशांत किशोर की छवि भाजपा की बी-टीम के रूप में बनाई जा रही थी. हालांकि, नीतीश कुमार और जेडीयू के प्रदर्शन पर प्रशांत के हमले चुनाव परिणामों में दिखाई दे रहे हैं. नतीजतन, जेडीयू सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद दिख रही है. प्रशांत किशोर ने खुद चुनाव न लड़कर लोगों को निराश किया, यह जानते हुए कि हारने से उनकी छवि पर नकारात्मक असर पड़ेगा. इसके अलावा आगे विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के भीतर आंतरिक कलह कई बार सामने आई है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है. यह देखा गया है कि प्रशांत किशोर का स्वभाव भी पार्टी नेताओं को उनसे असहज कर देता है. उनके सभी दावे निराधार साबित हुए.

प्रशांत किशोर की हार के 5 प्रमुख कारण

  1. जातिगत गतिशीलता को संबोधित करने में विफलता
  2. चुनाव लड़ने के लिए सोशल मीडिया और प्रभावशाली लोगों पर निर्भर रहना
  3. खुद चुनाव लड़ने में विफलता
  4. पार्टी को निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर समर्थन का अभाव
  5. उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में असहजता

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