विपक्षी खेमे में भी दोस्ती; पटना में खेसारी लाल यादव ने छुए मनोज तिवारी के पैर

पटना एयरपोर्ट पर भोजपुरी सितारे खेसारी लाल यादव (आरजेडी) और मनोज तिवारी (बीजेपी) की अचानक मुलाकात हुई. राजनीतिक मतभेदों के बावजूद खेसारी ने पैर छूकर सम्मान दिया, यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

Published by Team InKhabar

Bihar election 2025: पटना हवाई अड्डे पर कुछ ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान तुरंत खींच लिया. चुनावी गतिविधियों के बीच जब शहर में नेताओं और कलाकारों का आना-जाना बढ़ा हुआ है, उस दौरान दो जाने-माने भोजपुरी सितारे मनोज तिवारी और खेसारी लाल यादव एक ही स्थान पर मिले. मनोज तिवारी बीजेपी के प्रचार कार्यक्रम के लिए रवाना थे, जबकि आरजेडी के प्रत्याशी खेसारी लाल यादव भी अपने चुनावी शेड्यूल पर एयरपोर्ट पर मौजूद थे.

खेसारी ने मनोज तिवारी का पैर छूकर प्रणाम किया

जैसे ही खेसारी ने मनोज तिवारी को पहचाना,उन्होंने बिना किसी देरी के हाथ जोड़कर और उनका पैर छूकर प्रणाम किया. मनोज ने भी तुरंत मुस्कुराकर उनका हाथ थामा और दोनों ने एक दूसरे को गले लगाकर अभिवादन का आदान-प्रदान किया. यह गर्मजोशी भरा पल किसी औपचारिकता से बढ़कर दोस्ती और परस्पर सम्मान का प्रतीक लग रहा था.

सहज मुस्कान और शिष्टाचार

वहीं मौजूद यात्रियों और एयरपोर्ट स्टाफ ने उस पल को देखकर तालियां बजाईं और कई लोग अपना फोन निकालकर इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो बनाने लगे. दोनों कलाकारों के बीच की यह सहज मुस्कान और शिष्टाचार भले ही राजनीतिक रूप से अलग दिशाओं में हों, वहां खड़े सभी के लिए एक सकारात्मक संदेश बन गया कि मतभेदों के बावजूद आपसी सम्मान और मानवता पहले रहती है.

वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया

कुछ ही समय में यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया और लोगों ने इसे खूब शेयर किया. टिप्पणी करने वाले दर्शकों ने आम सहमति जताई कि इस तरह की सहज मित्रता राजनीतिक कटाव के माहौल में एक ताज़ी हवा की तरह लगती है. कई यूजर्स ने लिखा कि कलाकारों का यह व्यवहार युवा और प्रशंसकों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण पेश करता है.यह दृश्य इसलिए भी खास था क्योंकि चुनावी रैलियों और प्रचार-भरी घटनाओं में अक्सर कड़ी राजनीतिक भाषा सुनने को मिलती है, ऐसे में जब दो लोकप्रिय चेहरे इस तरह के सम्मान और अपनत्व का प्रदर्शन करते हैं तो वह न केवल खबर बनता है बल्कि संवाद और सौहार्द्र की भी याद दिलाता है. चाहे कोई किसी भी विचारधारा से क्यों न जुड़ा हो, मानवीय संजीदगी और शिष्ट व्यवहार हमेशा सराहनीय रहते हैं. यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार का पल नहीं रह गई . यह उन छोटे-छोटे संकेतों में से एक बन गई जो यह दिखाते हैं कि व्यक्तिगत संबंध और पारस्परिक सम्मान राजनीतिक विभाजन से ऊपर उठ सकते हैं. सोशल मीडिया पर वायरल यह क्लिप आज कई लोगों के लिए चुनावी शोर के बीच एक उत्साहजनक और उम्मीद भरा संदेश बनकर उभरा है.

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