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SEBI ने निवेशकों के साथ कर दिया खेला! मार ली पलटी, फैसले से IPO इन्वेस्टर दंग

SEBI ने ये प्रस्ताव IPO में रिटेल में  निवेशकों की कम भागीदारी की समस्या को देखते हुए दिया था। लेकिन अब सेबी अपने इस  प्रस्ताव से पीछे हट गया है।

Published by Divyanshi Singh

 Retail IPO Investor: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI )ने एक ऐसा फैसला लिया है। जिसे सुन कर हर कोई हैरान हो गया है। बता दें सेबी ने 5,000 करोड़ रुपये से बड़े IPO में रिटेल निवेशकों का कोटे में 10 % की कटौती का प्रस्ताव दिया था। बता दें रिटेल निवेशकों का कोटा 35% से है जिसे घटाकर 25% करने  का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन अब सेबी इससे पीछे हट गई है। अब रिटेल निवेशकों के कोटे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। वो जस का तस 35% ही रहेगा।

SEBI ने क्यों लिया ये फैसला ?

SEBI ने ये प्रस्ताव IPO में रिटेल में  निवेशकों की कम भागीदारी की समस्या को देखते हुए दिया था। लेकिन अब सेबी अपने इस  प्रस्ताव से पीछे हट गया है। सेबी ने कहा है कि वह इस मामले पर स्टेकहोल्डर्स के राय पर नजर रखेगा और खुदरा कोटा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। 

सेबी ने एक परामर्श पत्र में कहा कि बड़े आईपीओ में रिटेल सब्सक्रिप्श की समस्या के समाधान के लिए, वह कंपनियों को छोटे शेयरों के साथ सूचीबद्ध होने की अनुमति देगा। साथ ही, न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) नियमों को पूरा करने के लिए अधिक समय देगा। 

SEBI का पुराना प्लान

बता दें बीते जुलाई के आखिरी दिन SEBI ने कंसल्टेशन पेपर में 5,000 करोड़ रुपये से बड़े IPO के लिए खुदरा कोटा 35% से घटाकर 25% करने और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का कोटा 50% से बढ़ाकर 60% करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन इन्वेस्टर और मार्केट में शामिल लोगों ने इस पर विरोध जताया। विरोध जता रहे लोगों का कहाना था कि सेबी को सिर्फ खुदरा सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों पर  ही नहीं बल्कि प्राइसिंग पर भी ध्यान देना चाहिए। 

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सेबी ने दिया सुझाव

वहीं, अब सेबी ने कहा है कि म्यूचुअल फंड के ज़रिए खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है। म्यूचुअल फंड को पहले से ही क्यूआईबी श्रेणी में 5% आरक्षण मिलता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से खुदरा निवेशकों का प्रतिनिधित्व करता है। अब सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि नॉन-एंकर क्यूआईबी श्रेणी में म्यूचुअल फंड के लिए आरक्षण 5% से बढ़ाकर 15% कर दिया जाए। इससे खुदरा कोटे में कमी की भरपाई हो सकती है। सेबी ने सोमवार को एक और परामर्श पत्र जारी किया, जिसमें कहा गया है कि 50,000 करोड़ रुपये या उससे ज़्यादा मार्केट कैप वाली कंपनियों को कम शेयर के साथ लिस्टिंग की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, उन्हें एमपीएस नियमों को पूरा करने के लिए ज़्यादा समय दिया जाएगा।

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