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RBI New Rule: अब क्रेडिट स्कोर तय करेंगी आपकी ये छोटी आदतें, RBI के नए नियम से क्या बदला?

RBI New Rule Credit Score: आज की दुनिया में लोन, क्रेडिट कार्ड, या EMI (बराबर मासिक किस्तों) पर किसी भी सर्विस के लिए अप्लाई करते समय सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर देखा जाता है. यह स्कोर तय करता है कि बैंक आप पर भरोसा कर सकता है या नही?

Published by Mohammad Nematullah

RBI New Rule Credit Score: आज की दुनिया में लोन, क्रेडिट कार्ड, या EMI (बराबर मासिक किस्तों) पर किसी भी सर्विस के लिए अप्लाई करते समय सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर देखा जाता है. यह स्कोर तय करता है कि बैंक आप पर भरोसा कर सकता है या नही? अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने क्रेडिट स्कोर से जुड़े नियमों को और सख्त और ज़्यादा पारदर्शी बना दिया है. आइए विस्तार से समझते हैं कि अब हमारे क्रेडिट स्कोर की गणना कैसे की जाएगी और किन छोटी-छोटी बातों पर अब ध्यान दिया जाएगा.

क्रेडिट स्कोर की गणना कैसे की जाएगी?

RBI द्वारा बनाए गए नए नियमों के अनुसार आपका क्रेडिट स्कोर न केवल इस बात पर निर्भर करेगा कि आपने कभी लोन लिया है या नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि आप समय पर पेमेंट कर रहे हैं या नहीं. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप अपनी क्रेडिट लिमिट का कितना इस्तेमाल कर रहे हैं, और आप छोटे लोन और अपने क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट कितनी नियमित रूप से कर रहे है. किसी भी देरी से किए गए पेमेंट की रिपोर्ट कितनी जल्दी दी जाती है, यह भी एक फैक्टर होगा.

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क्या अब छोटी-छोटी बातें ज़्यादा मायने रखती?

पहले एक या दो दिन की देरी या छोटी रकम की समय पर रिपोर्ट न होने पर अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता था. लेकिन अब नए नियमों के तहत एक भी EMI पेमेंट में देरी आपके स्कोर को कम कर सकती है. सिर्फ़ न्यूनतम देय राशि का पेमेंट करने से भी आपके स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, और अपनी क्रेडिट कार्ड लिमिट का 70-80 प्रतिशत बार-बार इस्तेमाल करना भी आपके स्कोर के लिए जोखिम भरा है. इस सिस्टम के तहत वित्तीय अनुशासन अब बड़े लोन तक सीमित नहीं है; अब रोजमर्रा के खर्च भी आपकी क्रेडिट प्रोफ़ाइल को बना या बिगाड़ सकते है.

क्रेडिट स्कोर से कौन सी सेवाएं सीधे प्रभावित होंगी?

RBI के इस बदलाव का असर कई जरूरी सेवाओं में दिखेगा, जिनमें शामिल है

  • पर्सनल लोन और होम लोन: कम क्रेडिट स्कोर वालों के लिए ज़्यादा ब्याज दरें.
  • क्रेडिट कार्ड अप्रूवल: आपको कम क्रेडिट लिमिट मिल सकती है या आपका आवेदन रिजेक्ट हो सकता है.
  • अभी खरीदें, बाद में पेमेंट करें (BNPL) सेवाएं: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया सख्त होंगे.
  • फिनटेक ऐप्स और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफ़ॉर्म: डेटा ज़्यादा बार अपडेट किया जाएगा.
  • मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप और कारों जैसी चीज़ों को EMI (बराबर मासिक किस्तों) पर खरीदना ज़्यादा मुश्किल हो सकता है.
Mohammad Nematullah

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