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फर्जी सीए और स्कैमर्स पर चला इनकम टैक्स का हंटर, हलक से निकाल लिए 1045 करोड़ रुपये, मामला जान सब हैरान

ITR Filing:आयकर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए  देशभर में 150 से 200 स्थानों पर छापेमारी शुरू की। छापे मुख्य रूप से उन संस्थाओं और व्यक्तियों पर केंद्रित थे जो राजनीतिक दान, ट्यूशन फीस और स्वास्थ्य व्यय जैसे मदों में फर्जी दावे कर रहे थे।

Published by Divyanshi Singh

ITR Filing: ITR फाइलिंग को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए आयकर विभाग ने कई कदम उठाए थे जिसके रिजल्ट अब दिखने लगे हैं। विभाग ने टैक्सपेयर्स को सही दिशा-निर्देश देने से लेकर फर्जी सीए और स्कैमर्स पर नकेल कसने तक कई अहम कदम उठाए हैं। विभाग के इस प्रयास का असर Google Trends पर भी देखने को मिला। Google Trends पर पिछले 15 दिनों से ‘Income Tax Department’ टॉप कीवर्ड्स में ट्रेंड कर रहा है। आपको बता दें कि आयकर विभाग सिर्फ इन्ही वजहों से ही चर्चा में नहीं है बल्कि विभाग ने फर्जी टैक्स गतिविधियों में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और अन्य संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है।

वित्त मंत्रालय ने जारी किया सर्कुलर

कुछ दिन पहले ही सरकार ने आधिकारिक संदेश जारी कर फर्जीवाड़े का खुलासा किया।  सरकार ने बताया कि कुछ टैक्सपेयर्स ने फर्जी कटौतियों और छूट के जरिए रिंफड हासिल किए। आयकर विभाग ने ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। बता दें कि 14 जुलाई को वित्त मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी किया जिसमे वित मंत्रालय ने ये बताया कि  कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और प्रोफेशनल इंटरमीडियरीज टैक्सपेयर्स को फर्जी कटौतियों और छूट के जरिए ज्यादा रिफंड दिलाने में मदद कर रहे थे. 

200 स्थानों पर छापेमारी

वित्त मंत्राल के इस सर्कुलर के बाद आयकर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए  देशभर में 150 से 200 स्थानों पर छापेमारी शुरू की। छापे मुख्य रूप से उन संस्थाओं और व्यक्तियों पर केंद्रित थे जो राजनीतिक दान, ट्यूशन फीस और स्वास्थ्य व्यय जैसे मदों में फर्जी दावे कर रहे थे।

दिखा आयकर विभाग के कार्यवाही का असर

इस कार्यवाही में आयकर विभाग ने AI और डेटा एनालिटिक्स की मदद भी ली। शुरुवाती जांच में पता चला कि कई करदाताओं ने फर्जी रसीदों और दस्तावेजों के आधार पर गलत रिफंड लिया है। कुछ मामले तो ऐसे सामने आएं जिसमे TDS रिटर्न में भी फर्जीवाड़े का पता चला। आयकर विभाग के कार्यवाही का असर भी दिखा। पिछले कुछ महीनों में करीब 40,000 टैक्सपेयर्स ने खुद से ही अपने गलत दावों को वापस लिया है। बता दें इन दावों की कुल कीमत लगभग 1,045 करोड़ रुपये थी।

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धोखाधड़ी में सरकारी कर्मचारी भी शामिल

जांच में यह भी पता चला कि सरकारी कर्मचारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने वाले पेशेवर भी इस धोखाधड़ी में शामिल थे। कई मामलों में, लोग व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के ज़रिए फर्जी रिफंड पाने के तरीके सीख रहे थे। इन ग्रुप के ज़रिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने और झूठे दावे दायर करने की जानकारी साझा की जा रही थी।

आयकर विभाग का यह अभियान न केवल कर चोरी रोकने में मदद कर रहा है, बल्कि ईमानदार करदाताओं को सही मार्गदर्शन देकर उनकी मदद भी कर रहा है।

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