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EPFO में क्रांतिकारी बदलाव, जानें क्या है 8 बड़े अपडेट जो आपके पीएफ को बदल देंगे

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने साल 2025 में अपने सिस्टम को आधुनिक बनाने पर पूरी तरह ज़ोर दिया है. इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा (Social Security) को मजबूत करने के लिए 'EPFO 3.0' में बड़े बदलाव किए गए हैं.

Published by DARSHNA DEEP


8 major changes in EPFO:
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी (EPFO) ने साल 2025 में अपने सिस्टम को आधुनिक बनाने और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘EPFO 3.0’ के तहत कई बड़े और अहम बदलाव किए हैं.  जानकारी के मुताबिक, इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य रिटायरमेंट फंड को पूरी तरह से सुरक्षित रखना है. 

1. बेरोजगारी के दौरान निकासी (75% vs 100%)

नए नियमों के मुताबिक, नौकरी छूटने के तुरंत बाद आप अपने कुल पीएफ बैलेंस का केवल 75 प्रतिशत हिस्सा निकाल सकते हैं, तारी बाकी बचा 25 प्रतिशत हिस्सा अब 12 महीने की अंदर ही बेरोजगारी के बाद भी निकालने में सक्षम हो सके. पहले यह अवधि केवल 2 महीने की ही थी. 

2. पेंशन निकासी की समयसीमा में विस्तार (36 महीने)

ईपीएस (EPS) यानी पेंशन फंड से पैसा निकालने की अवधि को फिलहाल बढ़ा दिया गया है. इसके साथ ही अब कर्मचारी नौकरी छोड़ने या फिर रिटायरमेंट के 36 महीने यानी 3 साल बाद ही पेंशन फंड का पैसा निकाल सकेंगे. दरअसल, पहले यह सुविधा 2 महीने बाद ही मिल जाती थी, जिसका मुख्य उद्देश्य समय से पहले पेंशन फंड को खत्म होने से पूरी तरह से रोकने की कोशिश करना है. 

3. ‘25% न्यूनतम बैलेंस’ का नियम

इसके अलावा रिटायरमेंट के समय एक अच्छी रकम सुनिश्चित करने के लिए, EPFO ने यह बेहद ही अनिवार्य किया है कि निकासी के दौरान भी खाते में कुल जमा राशि का 25 प्रतिशत का हिस्सा हमेशा भविष्य के लिए बना रहना चाहिए. तो वहीं, दूसरी तरफ अगर आप पूरा 100 प्रतिशत फंड केवल विशेष परिस्थितियों जैसे 55 साल की आयु के बाद रिटायरमेंट में ही निकाल सकेंगे. 

4. निकासी श्रेणियों का सरलीकरण

जानकारी के मुताबिक, EPFO ने पहले की 13 अलग-अलग निकासी श्रेणियों को घटाकर केवल 3 मुख्य श्रेणियों में बांटने का काम किया है. जिसमें बीमारी, शिक्षा, शादी, घर खरीदना या फिर निर्माण, बेरोजगारी और प्राकृतिक आपदा को पूरी तरह से शामिल किया गया है.

5. सर्विस अवधि का एक समान नियम (12 महीने)

तो वहीं, अब आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) के लिए सेवा की न्यूनतम अवधि को सभी श्रेणियों के लिए एक समान 12 महीने के लिए ही कर दिया गया है. इससे कम समय की नौकरी वालों को भी आपात स्थिति में पैसा निकालने की सुविधा मिल सकेगी. 

6. ऑटो-मोड सेटलमेंट और डिजिटल पहुंच

EPFO 3.0 के जरिए, 5 लाख रुपये तक के दावों का निपटान अब ‘ऑटो-मोड’ में ही आसान तरीके से किया जा सकेगा. इसमें मानवीय हस्तक्षेप के बिना सिस्टम खुद क्लेम प्रोसेस करेगा, जिससे निपटान का समय हफ्तों से घटकर केवल 3 से 4 दिन का ही रह जाएगा.

7. निकासी की सीमा में वृद्धि

तो वहीं, शादी के लिए अब आप 5 बार और बच्चों की शिक्षा के लिए 10 बार तक पीएफ से पैसा बड़े ही आसान तरीके से निकाल सकेंगे. इसके साथ ही बीमारी के इलाज के लिए अब 6 महीने के वेतन के बराबर निकासी की आसानी की जा सकती है.

8. आईटी प्रणाली का अपग्रेडेशन

नया सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम (Centralized IT System) को पूरी तरह से लागू किया गया है, जिससे नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाएगी. इसके साथ ही अब कर्मचारियों को पुराने नियोक्ता के चक्कर काटने की किसी भी तरह की जरूरत नहीं पड़ेगी. 

EPFO 3.0 के ये बड़े और अहम बदलाव कर्मचारियों को आपात स्थिति में पैसा निकालने की सुविधा तो देते हैं, लेकिन इसके साथ ही 25 प्रतिशत बैलेंस और लंबी पेंशन समयसीमा के जरिए भविष्य की सुरक्षा भी पूरी तरह से तय करते हैं. 

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