Home > व्यापार > भारी नहीं, हल्का चाहिए! शादी सीजन में बदला गोल्ड ज्वेलरी का ट्रेंड, जानें कैसे इटैलियन मशीन ने बदला खेल?

भारी नहीं, हल्का चाहिए! शादी सीजन में बदला गोल्ड ज्वेलरी का ट्रेंड, जानें कैसे इटैलियन मशीन ने बदला खेल?

9 carat gold jewelry: पहले जहां 22 और 24 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता था, वहीं अब ग्राहक हल्के ज्वेलरी के लिए 18 कैरेट और 9 कैरेट की ज्वेलरी बनवा रहे हैं.

By: Shubahm Srivastava | Published: February 11, 2026 8:09:32 PM IST



Lightweight Gold Jewelry: सूरत में शादियों के मौसम में सोने की आसमान छूती कीमतों की वजह से ज्वेलरी मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है. कस्टमर अब ट्रेडिशनल भारी ज्वेलरी के बजाय ‘हल्के वज़न’ वाली ज्वेलरी की तरफ जा रहे हैं. इस ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए, ज्वेलर्स ने भी अपनी डिज़ाइन और कैरेट पसंद बदली है, 18 कैरेट और 9 कैरेट सोने का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे ज्वेलरी शानदार लेकिन वज़न में हल्की दिखती है.

दिखने में शानदार, वज़न में हल्की

डिज़ाइन पर खास ज़ोर, दिखने में शानदार, वज़न में हल्की लाइट वेट ज्वेलरी की सबसे बड़ी खासियत उसका डिज़ाइन होता है. ज्वेलर्स अब ऐसी टेक्नीक इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें सोना कम इस्तेमाल होता है लेकिन ज्वेलरी ‘भरी हुई’ और ‘बड़ी’ दिखती है.
 
बड़े स्टोन और मोतियों का इस्तेमाल ज्वेलरी को सुंदर और शानदार दिखाने के लिए बड़े साइज़ के स्टोन और मोतियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे सोने का इस्तेमाल कम होता है और ज्वेलरी की अपील बढ़ती है.

बड़े स्टोन और मोतियों का होता है इस्तेमाल

ज्वेलरी को सुंदर-शानदार दिखाने के लिए बड़े स्टोन और मोतियों का इस्तेमाल किया जाता है. ग्राहक 9-18 कैरेट की ज्वेलरी बनवा रहे हैं पहले जहां 22 और 24 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता था, वहीं अब ग्राहक हल्के ज्वेलरी के लिए 18 कैरेट और 9 कैरेट की ज्वेलरी बनवा रहे हैं. इस कम कैरेट सोने के इस्तेमाल से वजन कम करने में मदद मिलती है.
 
इटैलियन और मशीन से बनी ज्वेलरी ट्रेंड में लाइटवेट सेगमेंट में इस समय इटैलियन ज्वेलरी और मशीन से बनी ज्वेलरी सबसे ज्यादा ट्रेंड में हैं. इन डिजाइनों की लोकप्रियता के पीछे मुख्य कारण इनकी बनाने की तकनीक है.

हैवीवेट ज्वेलरी की जगह लाइटवेट ज्वेलरी की डिमांड बढ़ी

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक ज्वेलर्स ने बताया है कि वर्तमान में सोने की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं. नतीजतन हैवीवेट ज्वेलरी की जगह लाइटवेट ज्वेलरी की डिमांड बढ़ गई है.

इटैलियन और मशीन से बनी ज्वेलरी की डिमांड 

पहले 18 कैरेट थी, अब 9 कैरेट की हो गई है हल्के वजन के आभूषणों के लिए कम कैरेट की जरूरत होती है और वर्तमान में 9 कैरेट के आभूषण अच्छी बिक रहे हैं.
 
18 और 9 कैरेट के हल्के वजन के आभूषण मजबूत माने जा सकते हैं चोकसी के मुताबिक 24 कैरेट सबसे मुलायम होता है और उसके बाद 22 कैरेट का. हालांकि 18 और 9 कैरेट के हल्के वजन के आभूषण मजबूत माने जा सकते हैं. जब आभूषण हल्का होता है तो उसकी मजबूती बढ़ जाती है.
 
कारीगर भी नई तकनीक अपना रहे हैं परंपरागत रूप से भारतीय कारीगर हाथ से आभूषण बनाते हैं, जिसमें स्वाभाविक रूप से वजन का अनुपात अधिक होता है. हालांकि बदलते ट्रेंड के अनुरूप भारतीय कारीगरों ने अब हाथ से हल्के वजन के आभूषण भी बनाने शुरू कर दिए हैं. वे अब खोखले और हल्के वजन के डिजाइन बनाने के लिए इतालवी और मशीन से बने आभूषणों की तकनीक को समझ रहे हैं.
 
प्लेटिनम और चांदी की ओर बढ़ रहा रुझान सोने की बढ़ी कीमतों के कारण ग्राहक अब वैकल्पिक धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं. दीपक चोकसी के मुताबिक वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्लैटिनम की कीमतें कम हैं, इसलिए ग्राहक प्लेटिनम के आभूषणों की मांग कर रहे हैं. दूसरी ओर लोग चांदी के आभूषणों की भी मांग कर रहे हैं. सिल्वर-प्लैटिनम ज्वेलरी ग्राहकों को सुंदर डिज़ाइन और कम कीमत वाला विकल्प देती है.

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