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4500 साल पुराना रहस्य उजागर! गीजा के पिरामिड में मिला कुछ बहुत बड़ा; वैज्ञानिकों ने बताया मील का पत्थर

Giza Pyramids Menkaure : यह खोज काहिरा विश्वविद्यालय और जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (TUM) के वैज्ञानिकों ने ScanPyramids Project के तहत की है.

Published by Shubahm Srivastava

ScanPyramids Project : मिस्र के पुरातत्वविदों ने गीजा के पिरामिड ऑफ मेनकाउरे में दो रहस्यमयी ‘वॉयड्स’ (खाली स्थान) खोजे हैं, जो उस ‘खोए हुए प्रवेशद्वार’ की कुंजी साबित हो सकते हैं जिसकी तलाश वैज्ञानिक दशकों से कर रहे थे. यह पिरामिड करीब 4500 साल पुराना है और राजा मेनकाउरे की समाधि माना जाता है. तीनों प्रमुख गीजा पिरामिडों में सबसे छोटा होने के बावजूद, यह रहस्य के लिहाज से सबसे दिलचस्प है.

एडवांस तकनीकों का हुआ इस्तेमाल

यह खोज काहिरा विश्वविद्यालय और जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (TUM) के वैज्ञानिकों ने ScanPyramids Project के तहत की. इसमें georadar, ultrasound और electrical resistance tomography जैसी नॉन-डिस्ट्रक्टिव स्कैनिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जो बिना किसी ड्रिलिंग या नुकसान के पिरामिड के अंदर झांक सकती हैं.

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दो हवा से भरे खाली स्थानों का चला पता

इन स्कैनों में दो हवा से भरे खाली स्थानों का पता चला. पहला वॉयड लगभग 4.6 फीट गहरा, 3.2 फीट ऊंचा और 4.9 फीट चौड़ा है, जबकि दूसरा थोड़ा छोटा है — 3.7 फीट गहरा, 3 फीट ऊंचा और 2.3 फीट चौड़ा. ये वॉयड्स पिरामिड के पूर्वी हिस्से में पाए गए हैं, जहां पहले से चमकदार ग्रेनाइट ब्लॉक्स का एक असामान्य सेक्शन मौजूद था. इन पत्थरों की ऊंचाई लगभग 13 फीट और चौड़ाई 20 फीट है. इससे पहले इस तरह के ग्रेनाइट ब्लॉक्स सिर्फ पिरामिड के मुख्य (उत्तरी) प्रवेशद्वार के पास ही देखे गए थे.

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2019 में शोधकर्ता स्टीन वैन डेन होवेन ने अनुमान लगाया था कि यह पूर्वी हिस्सा किसी गुप्त प्रवेशद्वार का संकेत हो सकता है. अब इन वॉयड्स की खोज से यह सिद्धांत और मजबूत हुआ है.

पुरातत्व इतिहास में एक मील का पत्थर

वैज्ञानिकों का मानना है कि इन कक्षों के भीतर कोई छिपा हुआ मार्ग, सील्ड टनल या प्राचीन वस्तुएं हो सकती हैं. प्रोफेसर क्रिश्चियन ग्रॉसे ने कहा कि यह खोज मिस्र के पुरातत्व इतिहास में एक मील का पत्थर है, क्योंकि इससे साबित होता है कि पिरामिडों में अब भी कई अनजाने रहस्य छिपे हैं. 

आने वाले महीनों में इन वॉयड्स की रोबोटिक ड्रोन और फाइबर-ऑप्टिक कैमरों से विस्तृत जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह वास्तव में वह खोया हुआ प्रवेशद्वार है जिसकी खोज सदियों से जारी है.

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Shubahm Srivastava

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