US Visa: डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में लौटने के बाद US इमिग्रेशन पॉलिसी बहुत सख्त हो गई है. US स्टेट डिपार्टमेंट के लेटेस्ट डेटा के अनुसार पिछले एक साल में 100,000 से ज़्यादा वीज़ा रद्द किए गए है. एडमिनिस्ट्रेशन ने यह साफ कर दिया है कि सिक्योरिटी में सेंध और नियमों के उल्लंघन के मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी. इस सख्ती का सीधा असर US में रहने वाले भारतीयों और वहां जाने का सपना देखने वाले स्टूडेंट्स पर पड़ा है.
वीज़ा रद्द होने के 4 मुख्य कारण
स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगोट के अनुसार वीज़ा रद्द होने में 150% की बढ़ोतरी हुई है. इसके मुख्य कारण क्या है?
वीज़ा ओवरस्टे: वीज़ा खत्म होने के बाद भी US में रहना.
DUI (नशे में गाड़ी चलाना): H-1B और L-1 जैसे स्पेशल वीज़ा होल्डर्स के खिलाफ शराब पीकर गाड़ी चलाने पर सख्त कार्रवाई की गई है.
आपराधिक गतिविधियां: चोरी, मारपीट और ड्रग्स से जुड़े अपराध.
राजनीतिक एक्टिविज्म: विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया है कि जो स्टूडेंट्स और ग्रीन कार्ड होल्डर्स US की विदेश नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेते हैं, जैसे कि गाजा युद्ध में फिलिस्तीन का समर्थन करना, उन्हें भी देश से निकाला जा सकता है.
भारतीयों पर क्या असर पड़ा?
इस US कार्रवाई के केंद्र में भारतीय नागरिक भी रहे है. जैसा कि भारतीय सरकार द्वारा संसद में शेयर किए गए डेटा से पता चलता है. 21 नवंबर 2025 तक 3,155 भारतीयों को US से डिपोर्ट किया गया है. जबकि 2024 में यह संख्या 1,368 और 2023 में सिर्फ 617 थी. यह डिपोर्टेशन में काफी बढ़ोतरी दिखाता है. जनवरी 2025 से 300 से ज़्यादा भारतीय स्टूडेंट्स के वीज़ा रद्द कर दिए गए हैं, और हजारों SEVIS रिकॉर्ड खत्म कर दिए गए है. अब वीज़ा आवेदकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल की अच्छी तरह से जांच की जा रही है.
वीज़ा नियमों में बड़े बदलाव
H-1B वीज़ा के लिए लॉटरी सिस्टम पर निर्भरता कम की जा रही है, और योग्यता और नियमों के पालन पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है. भारत में H-1B और H-4 वीज़ा के लिए स्टैंपिंग प्रोसेस को और सख्त कर दिया गया है. इसमें सोशल मीडिया, ऑनलाइन पोस्ट और एक्टिविटीज की अनिवार्य समीक्षा शामिल है. H-1B वीज़ा चयन प्रक्रिया पूरी तरह से लॉटरी सिस्टम से हटकर, उच्च कौशल और सैलरी को प्राथमिकता दे रही है.

