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किस तारीख को खत्म हो जाएगी दुनिया? बाबा छोड़िए अब वैज्ञानिकों ने साक्षात देख लिया विनाश का राक्षस, जो बताया वो सुनकर कांप जाएंगे

Scientific Predictions On Earth Future : वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पृथ्वी के विनाश के वर्ष की भविष्यवाणी की है। इंग्लैंड की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के भविष्य पर एक अध्ययन रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य हैं।

Published by Shubahm Srivastava

Scientific Predictions On Earth Future : वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पृथ्वी के विनाश के वर्ष की भविष्यवाणी की है। इंग्लैंड की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के भविष्य पर एक अध्ययन रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारी पृथ्वी विनाश की ओर बढ़ रही है। अध्ययन रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि एक समय ऐसा आएगा जब पृथ्वी पर कोई जीवन नहीं बचेगा। आशंका जताई गई है कि यह स्थिति आज से करीब 25 करोड़ साल बाद पैदा होगी।

रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सिमुलेशन तकनीक के जरिए धरती का भविष्य देखने की कोशिश की है। इसमें जब ग्लोबल वार्मिंग को इनपुट किया गया तो पता चला कि 250 मिलियन साल बाद धरती का तापमान 70 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा। इतने गर्म वातावरण में किसी भी जीव का जिंदा रहना मुश्किल हो जाएगा और इस गर्मी की वजह से हमारी दुनिया खत्म हो जाएगी।

एक वक्त सबकुछ खत्म हो जाएगा – वैज्ञानिक

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस गति से पृथ्वी पर कार्बन उत्सर्जन की मात्रा बढ़ रही है, हम उसी गति से अपने विनाश की ओर बढ़ रहे हैं। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से तापमान बढ़ता रहेगा और एक समय ऐसा आएगा जब सब कुछ नष्ट हो जाएगा।

सुपरकॉन्टिनेंट ‘पैंजिया अल्टिमा’ का होगा निर्माण

इस अध्ययन में धरती के इतिहास और भविष्य को जोड़ने की कोशिश की गई। अध्ययन के अनुसार 33 करोड़ से 17 करोड़ साल पहले धरती पर पैंजिया नाम का महाद्वीप था। फिर धीरे-धीरे धरती अपनी वर्तमान स्थिति में पहुंची। अब 25 करोड़ साल बाद सभी महाद्वीप आपस में मिलकर सुपरकॉन्टिनेंट ‘पैंजिया अल्टिमा’ का निर्माण करेंगे। ऐसा पानी के सूखने की वजह से होगा। धरती पहले गर्म होगी, फिर सूख जाएगी। धरती की सतह पर कई ज्वालामुखी हैं। गर्मी बढ़ने पर इनमें विस्फोट होने लगेंगे।

शोधकर्ता एलेक्जेंडर फ़ार्न्सवर्थ ने कहा कि कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़ने से सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। जीव-जंतु तड़प-तड़प कर मरने लगेंगे। एक साथ बड़ी संख्या में लोग मरेंगे। शोधकर्ता ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में पैंजिया अल्टिमा के दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों के तटों पर रहने की स्थिति ख़तरनाक रह सकती है।

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Shubahm Srivastava
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