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हाल ही में एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसे सुन कर हर एक इस वक्त सदमें में जा चूका है, श्रीनगर का ऐतिहासिक लाल चौक आज किसी व्यापारिक केंद्र की तरह नहीं, बल्कि एक विलाप स्थल की तरह शांत और गमगीन नजर आया, ईरान के सर्वोच्च रहबर ‘अयातुल्ला अली खामेनेई’ की शहादत की खबर जैसे ही वादी के कोनों तक पहुंची, लोग अपने घरों से निकलकर घंटा घर की ओर खिंचे चले आए, हवाओं में एक अजीब सी खामोशी थी, जिसे बीच-बीच में उठती सिसकियों और नौहाख्वानी की आवाजों ने तोड़ा. बूढ़े, जवान और मासूम बच्चे—सबकी आंखों में आंसू हैं और हाथों में काले झंडे, जो इस बात का गवाह थे कि कश्मीर के दिल में ईरान के प्रति कितनी गहरी मोहब्बत है.
घंटा घर की दीवारों ने आज एक ऐसा मंजर देखा, जहां सरहदें मिट गई थीं, मोमबत्तियों की मद्धम रोशनी में लोगों के उदास चेहरे साफ झलक रहे थे. शोक सभा में शामिल लोगों ने नम आंखों से कहा कि उन्होंने आज अपने ‘रहनुमा’ और ‘मजलूमों के मसीहा’ को खो दिया है, यह केवल एक राजनीतिक नेता की मृत्यु का दुख नहीं था, बल्कि एक रूहानी रिश्ते का टूट जाना था, लाल चौक के सन्नाटे में गूंजती दुआएं और अपनों को खोने का यह अहसास हर देखने वाले की रूह को झकझोर रहा था.

