New Year 2026: नए साल के जश्न पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने फिर लगाया ‘फतवा’ का पहरा, मुस्लिम युवाओं को दे दी ये हिदायत

New Year 2026 Celebration News: अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक फतवा जारी कर मुस्लिम युवक और युवतियों से नए साल के जश्न से दूर रहने की सलाह दी है. पिछले साल भी मौलाना ने फतवा जारी किया था.

Published by Hasnain Alam

New Year 2026 Celebration: नए साल पर जश्न को लेकर अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक फतवा जारी किया है, जिसको लेकर विवाद शुरू हो गया है. उन्होंने कहा है कि किसी भी हाल में नए साल पर पार्टी का आयोजन नहीं किया जाना चाहिए, अगर कोई मुस्लिम युवक और युवती ऐसा करता है और उसमें नाच, गाना-बजाना या दिखावा करता है, तो इस्लामिक विद्वान ऐसे आयोजनों का सख्त विरोध करेंगे.

इसके पहले भी साल 2024 में भी मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने फतवा जारी किया था, जिसमें नए साल के जश्न मनाने, नए साल की मुबारकबाद देने को भी गलत बताया गया था. इस फतवे में मुसलमान को नए साल के जश्न से बचने की  हिदायत दी गई थी.

नए साल के जश्न को अंग्रेज और ईसाइयों का बताया

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की ओर से जारी फतवा में नए साल के जश्न को अंग्रेज और ईसाइयों का त्योहार करार देते हुए इससे दूर रहने की सलाह दी गई थी. नए साल के जश्न में मुसलमानों को पटाखे फोड़ना, तालियां बजाने, नाच-गाना करने से यह कहते हुए मना किया गया था कि इन कामों को करने वाला हर एक मुसलमान गुनहगार माना जाएगा.

वहीं अब मौलाना रजवी ने एएनआई से बातचीत के दौरान यह भी कहा है कि केवल इस्लाम ही नहीं, बल्कि हिंदू धर्म में भी नया साल जनवरी से नहीं मनाया जाता है. उन्होंने कहा कि इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से नया साल मुहर्रम के महीने में शुरू होता है, जबकि हिंदू धर्म में नया साल चैत्र महीने से शुरू होता है.

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‘जनवरी का महीना हिंदू-मुसलमानों के जश्न मनाने का नहीं’

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जनवरी का महीना न तो हिंदुओं के जश्न मनाने का है और न ही मुस्लिमों के जश्न मनाने का है. ऐसे में उन्होंने पश्चिमी परंपराओं की नकल करके नए साल का जश्न मनाना इस्लाम विरोधी करार देते हुए इससे दूर ही रहने की सलाह दी है.

पिछले साल भी इसी समय मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने फतवा जारी कर आज के मुस्लिम युवाओं से नए साल के जश्न से दूर रहने की हिदायत दी थी, लेकिन उसका कितना असर पड़ा था, ये किसी से छिपा नहीं है. इस बार के मौलाना के पहरे से नए साल के जश्न पर कितना असर पड़ेगा, ये तो आगे आने वाला वक्त ही बताएगा.

(करुणा निधान पांडे की रिपोर्ट)

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