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AI टूल की वजह से 6,000 छात्रों पर झूठे चीटिंग के आरोप! अब यूनिवर्सिटी की हुई किरकिरी

यह मामला ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी (ACU) का है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में यूनिवर्सिटी ने अपने नौ कैंपसों में लगभग 6,000 स्टूडेंट्स के खिलाफ अकैडमिक मिसकंडक्ट के केस दर्ज किए थे. इनमें से लगभग 90 प्रतिशत केस AI यूज से जुड़े बताए गए.

Published by Renu chouhan

ऑस्ट्रेलिया की एक बड़ी यूनिवर्सिटी पर भारी विवाद छिड़ गया है क्योंकि उसने करीब 6,000 छात्रों पर गलत तरीके से आरोप लगाया कि उन्होंने एग्जाम या असाइनमेंट में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके चीटिंग की है. दरअसल यह पूरा मामला एक खराब AI डिटेक्शन सिस्टम की वजह से हुआ जो बाद में फेल साबित हुआ. यह मामला ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी (ACU) का है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में यूनिवर्सिटी ने अपने नौ कैंपसों में लगभग 6,000 स्टूडेंट्स के खिलाफ अकैडमिक मिसकंडक्ट के केस दर्ज किए थे. इनमें से लगभग 90 प्रतिशत केस AI यूज से जुड़े बताए गए.

AI टूल की गलती से निर्दोष छात्र बने आरोपी
यह सभी आरोप एक सॉफ्टवेयर Turnitin के AI डिटेक्टर टूल पर आधारित थे. यह वही सॉफ्टवेयर है जो आमतौर पर प्लेज़रिज़्म यानी कॉपी की गई सामग्री पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन 2023 में इसमें एक AI डिटेक्शन फीचर जोड़ा गया जो अब गलत रिजल्ट देने के लिए बदनाम हो चुका है. Turnitin की वेबसाइट खुद मानती है कि उसके AI रिपोर्ट्स “हमेशा सटीक नहीं होतीं”. इसके बावजूद यूनिवर्सिटी ने इन रिपोर्ट्स को पक्के सबूत की तरह इस्तेमाल किया और छात्रों पर चीटिंग का आरोप लगा दिया.

छात्रों पर गलत आरोप, जिंदगी पर असर
कई छात्रों ने बताया कि उन्हें सेमेस्टर खत्म होने के बाद अचानक ईमेल मिला कि उन्होंने AI से चीटिंग की है. 22 साल की नर्सिंग स्टूडेंट मेडेलीन ने बताया कि इस आरोप ने उनकी जिंदगी बदल दी. उन्होंने कहा, “पहले से ही मैं स्ट्रेस में थी और फिर मुझे अकैडमिक मिसकंडक्ट बोर्ड से ईमेल आने लगे कि मुझे बताना है कि ऐसा क्यों हुआ.” यूनिवर्सिटी को उनकी निर्दोषता साबित करने में छह महीने लग गए. मेडेलीन ने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करूं. क्या पढ़ाई छोड़ दूं या फिर नर्सिंग जारी रखूं.”

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यूनिवर्सिटी को पहले से थी गलती की जानकारी
अब सामने आए डॉक्युमेंट्स से पता चला है कि यूनिवर्सिटी को इस टूल की गलतियों के बारे में एक साल पहले से जानकारी थी. इसके बावजूद उसने मार्च 2024 तक इसका इस्तेमाल जारी रखा. बाद में जब मामला बढ़ा तो यूनिवर्सिटी ने इस सिस्टम को बंद कर दिया.

AI के गलत इस्तेमाल पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर गुस्सा भड़का दिया. लोगों ने इसे “शर्मनाक” और “विडंबनापूर्ण” बताया. एक यूज़र ने लिखा, “सोचिए, स्टूडेंट्स को सज़ा दी जा रही है AI इस्तेमाल करने पर और वहीं टीचर्स खुद AI से पेपर चेक कर रहे हैं.” एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि कैसे एजुकेशन में AI का गलत इस्तेमाल छात्रों की ज़िंदगी पर गंभीर असर डाल सकता है. बिना ठोस सबूत के किसी को एल्गोरिथ्म के आधार पर चीटर कहना खतरनाक ट्रेंड है.

भविष्य के लिए सीख
AI टेक्नोलॉजी जहां शिक्षा को आसान बना रही है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल गंभीर परिणाम दे सकता है. यूनिवर्सिटी के लिए यह मामला चेतावनी है कि सिर्फ AI रिपोर्ट के आधार पर किसी को दोषी न ठहराया जाए. मानव समीक्षा और न्यायपूर्ण प्रक्रिया जरूरी है ताकि निर्दोष छात्रों का करियर बर्बाद न हो.

Renu chouhan
Published by Renu chouhan

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