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Sachin-Gurusharan Patnership: वो खिलाड़ी जिसने टूटे हाथ से भी मैदान में की थी सचिन की मदद, ‘मास्टर ब्लास्टर’ ने साझा किया वो भावुक पल

सचिन तेंदुलकर ने याद किया 1989 का सबसे भावनात्मक पल, जब एक साथी खिलाड़ी टूटे हाथ के बावजूद मैदान पर आया. जानिए गुरशरण सिंह की कहानी जिसने बदल दिया था 'क्रिकेट के भगवान' का करियर.

Published by Shivani Singh

क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने आज मंगलवार 9 दिसम्बर को 1989-90 के एक भावनात्मक पल को साझा किया, जब अपना हाथ टूटा होने के बावजूद, पूर्व भारतीय खिलाड़ी गुरशरण सिंह नंबर 10 पर बल्लेबाजी करने आए और वानखेड़े स्टेडियम में रेस्ट ऑफ इंडिया और दिल्ली के बीच ईरानी कप मैच में तेंदुलकर को 103 रन बनाने में मदद की.

गुरशरण सिंह का योगदान

दिल्ली ने यह मैच 309 रनों से जीता. रेस्ट ऑफ इंडिया 554 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए 245 रनों पर ऑल आउट हो गई. तेंदुलकर के शतक के अलावा, डब्ल्यूवी रमन (WV Raman) के 41 रन ही टीम की एकमात्र उल्लेखनीय पारी थी.

जब रेस्ट ऑफ इंडिया 209 रन पर नौ विकेट गंवाकर संकट में थी, तब गुरशरण सिंह टूटे हुए हाथ के साथ बल्लेबाजी करने आए. उन्होंने तेंदुलकर के साथ आखिरी विकेट की साझेदारी में 36 रन जोड़ने में महत्वपूर्ण मदद की.

तेंदुलकर ने याद किया चयन से पहले का पल

एक इवेंट में उस घटना को याद करते हुए, तेंदुलकर ने कहा “जैसा कि कहा जाता है, वादे निभाने के लिए होते हैं. मुझे लगता है कि मैं एक कदम और आगे बढ़कर कहूंगा कि वादे निभाने के लिए होते हैं, लेकिन उन्हें पूरा भी किया जाना चाहिए… और यही हमारा डीएनए है.”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे एक घटना याद है… बहुत पहले 1989 की, जब मैं ईरानी ट्रॉफी खेल रहा था. यह भारत के लिए चुने जाने से पहले एक ट्रायल मैच था. मैं 90 के स्कोर पर बल्लेबाजी कर रहा था, और मेरे साथी, गुरशरण सिंह, चोटिल थे उनका हाथ टूटा हुआ था और उन्हें बल्लेबाजी नहीं करनी थी. लेकिन चयन समिति के अध्यक्ष, राज सिंह डूंगरपुर, ने उनसे बाहर जाकर बल्लेबाजी करने और अपने टीममेट को सपोर्ट करने के लिए कहा.”

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“गुरशरण आए और मुझे अपना शतक पूरा करने में मदद की और उसके बाद मेरा चयन भारत के लिए खेलने के लिए हो गया. बाद में, गुरशरण भी भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बने.”

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गुरशरण सिंह के जज़्बे को सलाम

गुरशरण सिंह, जिन्होंने बाद में भारत के लिए एक टेस्ट मैच और एक वनडे खेला, तेंदुलकर ने उनके इस बलिदान के लिए दिल से धन्यवाद किया.

तेंदुलकर ने कहा, “मैंने मैदान पर और ड्रेसिंग रूम में उनका बहुत-बहुत शुक्रिया अदा किया क्योंकि टूटे हाथ के साथ बाहर आना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी.”

उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा “सिर्फ टूटे हाथ के साथ बाहर आना ही बहुत बड़ी बात थी. मैंने शतक बनाया या नहीं, यह सेकेंडरी था. उनका इरादा और रवैया मेरे लिए सबसे ज़्यादा मायने रखता था और इसने सच में मेरे दिल को छू लिया.”

Shivani Singh

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