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नीता अंबानी से काव्या मारन तक! IPL में महिला लीडरशिप कैसे बदल रही है खेल का चेहरा, सरकार की भी ऐसे होती है कमाई

IPL सिर्फ क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं, बल्कि एक बड़ी इंडस्ट्री बन चुकी है जहां हर साल खिलाड़ियों से लेकर टीम मालिकों, ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों और सरकार तक सभी की मोटी कमाई होती है. आइए जानते हैं अगर BCCI टैक्स नहीं देता तो सरकार कैसे कमा लेती है आईपीएल से करोड़ों रुपए?

Published by Mohammad Nematullah
Indian Premier League: IPL यानी इंडियन प्रीमियर लीग दुनिया की सबसे महंगी और पॉपुलर क्रिकेट लीग है. हर साल IPL में अरबों रुपये का लेन-देन होता है. IPL सिर्फ़ एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री है जहां खिलाड़ी और टीम मालिक से लेकर ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों और सरकार तक. हर कोई हर साल अच्छी-खासी कमाई करता है. हालांकि भारतीय सरकार को इस लीग से सीधे टैक्स नहीं मिलता, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से यह सरकार के लिए रेवेन्यू का एक बड़ा जरिया बन गया है.

IPL कितनी कमाई करता है?

IPL की कमाई का सबसे बड़ा जरिया मीडिया और ब्रॉडकास्टिंग राइट्स है. स्टार स्पोर्ट्स और जियो सिनेमा ने मिलकर 2023 से 2027 तक के लिए IPL के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स हासिल किए है. उन्होंने इसके लिए ₹48,390 करोड़ की डील की है. इसका मतलब है कि IPL हर साल ₹12,097 करोड़ कमाता है. यह रकम फिर BCCI और फ्रेंचाइजी के बीच बराबर बांटी जाती है.

BCCI टैक्स नहीं देता

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हर साल ₹12,000 करोड़ कमाने के बावजूद BCCI एक भी रुपया टैक्स नहीं देता है. भारतीय सरकार IPL की इस भारी कमाई पर सीधे टैक्स नहीं लगाती है. इसके पीछे वजह यह है कि 2021 में BCCI ने यह तर्क दिया था कि IPL आयोजित करने का मकसद क्रिकेट को बढ़ावा देना है, और इसलिए इसे टैक्स से छूट मिलनी चाहिए. टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ने BCCI की अपील मान ली और तब से BCCI ने अपनी IPL कमाई पर सरकार को कोई टैक्स नहीं दिया है.

सरकार पैसे कैसे कमाती है?

भले ही IPL टैक्स-फ्री है फिर भी सरकार इससे कमाई कर लेती है. सरकार खिलाड़ियों की सैलरी से काटे गए TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) के जरिए अच्छी-खासी रकम कमाती है. 2025 के मेगा ऑक्शन में 10 टीमों ने खिलाड़ियों को खरीदने के लिए ₹639.15 करोड़ खर्च किए. इस ऑक्शन में 120 भारतीय और 62 विदेशी खिलाड़ियों की नीलामी हुई. सरकार फिर इन खिलाड़ियों को मिलने वाली सैलरी से टैक्स वसूलती है. नियम यह है कि सरकार भारतीय खिलाड़ियों की सैलरी पर 10% TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) और विदेशी खिलाड़ियों की सैलरी पर 20% TDS लगाती है. इस तरह सरकार को IPL 2025 से टैक्स के रूप में ₹89.49 करोड़ मिलते है.

उदाहरण के लिए अगर ऋषभ पंत IPL के सबसे महंगे खिलाड़ी है और उन्हें ₹27 करोड़ की सैलरी मिलती है, तो उन्हें इस पर 10% टैक्स देना होगा, जो कि ₹2.7 लाख है.

इंडियन प्रीमियर लीग या IPL सिर्फ़ रोमांचक क्रिकेट तक ही सीमित नहीं है. खिलाड़ी मैदान पर जितनी मेहनत करते हैं, उतनी ही मेहनत पर्दे के पीछे भी करते है. फ्रेंचाइजी हर खिलाड़ी को अपनी टीम में शामिल करने के लिए बहुत मेहनत करती है. IPL और उसकी फ्रेंचाइजी को चलाने में महिलाएं भी महत्वपूर्ण योगदान देती है. आज हम आपको IPL की पावरफुल महिलाओं के बारे में बताने जा रहे है.

नीता अंबानी- मुंबई इंडियंस

नीता अंबानी मुंबई इंडियंस की मालकिन है. वह लीग की शुरुआत से ही इससे जुड़ी हुई है. वह टीम के अंदर “वन फैमिली” कल्चर को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है. मुंबई इंडियंस IPL की सबसे सफल टीमों में से एक है, जिसने पांच बार खिताब जीता है.

काव्या मारन – सनराइजर्स हैदराबाद

काव्या मारन सनराइजर्स हैदराबाद की CEO है. वह नीलामी से लेकर खिलाड़ियों को रिलीज करने और रिटेन करने तक हर चीज में शामिल रहती है. वह अपनी टीम की सबसे बड़ी समर्थक भी है. हैदराबाद के मैचों के दौरान स्टेडियम में काव्या का जुनून साफ ​​दिखता है.

प्रीति जिंटा – पंजाब किंग्स

IPL ट्रॉफी अभी तक पंजाब किंग्स के पास नहीं आई है. इसके बावजूद प्रीति जिंटा लगातार अथक प्रयास कर रही है. वह पंजाब किंग्स टीम का चेहरा भी है. भले ही वह अमेरिका में रहती है, लेकिन IPL मैचों के लिए भारत आती है.

IPL में कहां से आता है इतना पैसा

 IPL में सिर्फ़ एक या दो नहीं, बल्कि कमाई के कई सोर्स है. यह गेम हर कदम पर नाम और शोहरत देता है. बेसिकली, सेंट्रल रेवेन्यू कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा है. और इसमें दो चीजें शामिल है. पहला है मीडिया राइट्स और दूसरा है टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स जिससे BCCI और फ्रेंचाइजी अपने मुनाफे का 70 प्रतिशत कमाते है.

मीडिया और डिजिटल राइट्स

इसका मतलब है कि IPL को टेलीविजन पर लाइव ब्रॉडकास्ट करने के लिए चैनल जो कीमत चुकाते है. सैटेलाइट टीवी चैनल भारी रकम देकर मीडिया राइट्स खरीदते है. इससे होने वाली कमाई का आधा हिस्सा BCCI अपने पास रखता है, और बाकी आधा सभी टीमों में बांटा जाता है. 2008 में पहले सीज़न के दौरान सोनी ने अगले 10 सालों के लिए टूर्नामेंट के टीवी राइट्स खरीद लिए था. यह संघर्ष कर रहे सेट मैक्स चैनल के लिए एक बहुत बड़ा जुआ था. सोनी ने उस समय ₹8,200 करोड़ में राइट्स खरीदे थे. इसके बाद 2018 से 2023 तक मीडिया राइट्स स्टार इंडिया के पास थे.

टाइटल स्पॉन्सरशिप

DLF IPL, Vivo IPL, Tata IPL… यह एक ऐसी स्कीम है जहां कंपनियां IPL के साथ अपना नाम जोड़ने के लिए पैसे देती है. जो कंपनी सबसे ज़्यादा बोली लगाती है, उसे टाइटल स्पॉन्सरशिप मिलती है. इससे वे क्रिकेट के ज़रिए अपने ब्रांड का प्रमोशन कर पाते है. यह IPL के लिए इनकम का दूसरा सबसे बड़ा सोर्स है. अभी टाटा IPL का टाइटल स्पॉन्सर है. टाटा ग्रुप ने दो सीज़न के लिए ₹670 करोड़ में राइट्स खरीदे थे. वीवो ने भी बीच में डील तोड़ने के लिए टर्मिनेशन फीस दी थी. इस तरह BCCI 2022-2023 में कुल ₹1124 करोड़ कमाएगा.

कमर्शियल विज्ञापन और किट स्पॉन्सरशिप

मैच में हर ओवर के बाद एक छोटा ब्रेक होता है, और उस ब्रेक के दौरान टीवी पर विज्ञापन दिखाए जाते है. एक रिपोर्ट के अनुसार मैच के दौरान 10 सेकंड के विज्ञापन स्लॉट की कीमत लगभग 15 लाख रुपये होती है. चिप्स से लेकर कोल्ड ड्रिंक्स और अनगिनत दूसरे प्रोडक्ट्स की बिक्री में काफी बढ़ोतरी होती है. मैच के दौरान इन विज्ञापनों से BCCI की कुल कमाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा आता है. इसके अलावा  फ्रेंचाइजी टी-शर्ट, कैप, हेलमेट, स्टंप और यहां तक ​​कि अंपायरों की यूनिफॉर्म पर लगे लोगो से भी काफी पैसा कमाती है.

लोकल रेवेन्यू

आखिर में लोकल रेवेन्यू होता है, जिसमें लोकल स्पॉन्सरशिप और प्राइज मनी शामिल है. हर मैच के टिकटों की बिक्री से सालाना लगभग पांच करोड़ रुपये मिलते है. अगर मैच किसी टीम के होम ग्राउंड पर खेला जाता है, तो फ्रेंचाइजी को उस रेवेन्यू का 80 प्रतिशत मिलता है. इसके अलावा कोई टीम लोकल लेवल पर जितनी ज़्यादा पॉपुलर होती है, उतने ही ज़्यादा लोकल स्पॉन्सर उसे मिलते है. चैंपियनशिप प्राइज मनी से भी रेवेन्यू आता है, जिसका आधा हिस्सा टीम के खिलाड़ियों को और बाकी आधा कंपनी को जाता है.

Mohammad Nematullah
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