IPL 2026: भारतीय क्रिकेट की असली खूबसूरती यही है कि यहां खिलाड़ी चमकदार बैकग्राउंड से नहीं, बल्कि कठिन हालातों से उभरकर सामने आते है. बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मंगेश यादव भी ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों को अपनी ताकत में बदल दिया. उनका सफर इस बात की मिसाल है कि जुनून और मेहनत के दम पर किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है.
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 की मिनी नीलामी में जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने मंगेश यादव को 5.2 करोड़ रुपये में खरीदा, तो ये सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं थी. ये उस पिता की मेहनत और त्याग का परिणाम था, जिसने ट्रक चलाकर अपने बेटे के सपनों को जिंदा रखा.
संघर्ष भरे दिनों की कहानी
हाल ही में मंगेश यादव अपने पिता रामावध यादव के साथ RCB Bold Diaries में नजर आए, जहां दोनों ने अपने पुराने दिनों को याद किया. उनके पिता ने बताया कि ट्रक ड्राइवर की जिंदगी कितनी कठिन होती है, न समय पर खाना, न आराम और हर वक्त काम की चिंता. उन्होंने ये भी शेयर किया कि बेटे की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें कई बार रातों की नींद तक त्यागनी पड़ी. सफर के दौरान भी उनके मन में यही सवाल रहता था कि आगे का खर्च कैसे पूरा होगा.
मां बनीं पहली कोच
मंगेश के क्रिकेट करियर में उनके चाचा और कोच फूलचंद शर्मा की अहम भूमिका रही, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें गांव से दिल्ली तक पहुंचाया. वहीं से उनके करियर ने स्पीड पकड़ी. बचपन में जब मंगेश मोहल्ले में खेलते हुए अक्सर झगड़ों के कारण निराश हो जाते थे, तब उनकी मां ने उन्हें संभाला. घर के छोटे से आंगन में वो गेंदबाजी करतीं और मंगेश घंटों अभ्यास करते यही उनकी शुरुआती ट्रेनिंग थी.
IPL डेब्यू की दहलीज पर
मध्य प्रदेश टी20 लीग में शानदार प्रदर्शन के बाद मंगेश यादव ने अपनी अलग पहचान बनाई और IPL तक पहुंचने का सपना साकार किया. मौजूदा हालात में RCB के कुछ तेज गेंदबाज चोटिल हैं, जिससे मंगेश को जल्द ही डेब्यू का मौका मिल सकता है.
RCB अपना अभियान 28 मार्च को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ शुरू करेगी और इस युवा गेंदबाज पर सबकी नजरें टिकी होंगी. मंगेश यादव की कहानी ये साबित करती है कि मजबूत इरादों और परिवार के साथ से कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता.

