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स्पेस में कैसे बनाते हैं कॉफ़ी? शुभांशु शुक्ला ने वीडियो शेयर कर बताई शानदार टेक्निक

Shubhanshu Shukla:वीडियो में शुभांशु शुक्ला दिखा रहे हैं कि अंतरिक्ष की दुनिया कितनी अलग है। उन्होंने बताया कि गुरुत्वाकर्षण न होने की वजह से यहां सब कुछ उड़ता रहता है।

Published by Divyanshi Singh

Shubhanshu Shukla: अक्सर आपने देखा होगा कि स्पेस में एस्ट्रोनॉट (Astronaut) के आस-पास की सारी चीजें उड़ती रहती है। ऐसा स्पेस में ग्रेविटी ना होने कि वजह से होता है। अब आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि अगर वहां सब कुछ उड़ता रहता है तो एस्ट्रोनॉट वहां खाना कैसे खाते हैं या कॉफ़ी कैसे पीते हैं।इसी सवाल का जवाब भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बताया है। स्पेस में खाना खाने के प्रोसेस को जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। 

शेयर किया वीडियो

इंटरनेशनल स्पेस का दौरा करने वाले पहले इसरो अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने हाल ही में एक चौंकाने वाला वीडियो शेयर कर यह दिखाया कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर रहते हुए वो किस तरह से अपना खाना खाया करते थे। इसरो अंतरिक्ष यात्री ने बताया कि जीरो ग्रेविटी में अंतरिक्ष यात्री किस तरह खाना खाते हैं।

उड़ता रहता है सब कुछ

वीडियो में शुभांशु शुक्ला दिखा रहे हैं कि अंतरिक्ष की दुनिया कितनी अलग है। उन्होंने बताया कि गुरुत्वाकर्षण न होने की वजह से यहां सब कुछ उड़ता रहता है। सब कुछ हवा में ही रहता है। इस वजह से हर चीज़ को वेल्क्रो या टेप से चिपकाना पड़ता है। इसके बाद, यह दिखाने के लिए कि सब कुछ कैसे उड़ता रहता है, शुभांशु ने एक चम्मच उठाया और वह उड़ने लगा। यह देखना बेहद दिलचस्प था।

अंतरिक्ष में कैसे बनाते हैं कॉफ़ी ?

इसके बाद शुभांशु शुक्ला ने बताया कि खाना कैसे खाया जाता है। उनके हाथ में कॉफ़ी का एक पैकेट था। जैसे ही उन्होंने उसे खोला, स्ट्रॉ से कॉफ़ी निकली और एक बुलबुला बना। फिर शुभांशु ने इस बुलबुले को खा लिया। इसके बाद उन्होंने मज़ाक में कहा, “अंतरिक्ष में आप असल में पानी खा सकते हैं।”

शेयर किया वीडियो

स्पेस में खाना खाने का अपना एक वीडियो शेयर करते हुए इसरो के एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने लिखा, स्पेस में खाना, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे दोबारा खाना सीखना पड़ेगा। यहाँ मैं बता रहा हूं कि अंतरिक्ष में खाते समय आदतें क्यों ज़रूरी हैं। अगर ध्यान न दिया जाए, तो चीज़ें बिगड़ सकती हैं। अंतरिक्ष में हर काम के लिए एक अच्छा मंत्र है, ‘धीरे ही तेज़”।

स्पेस में इस तरह पचता है खाना

उन्होंने आगे बताया एक और दिलचस्प बात यह है कि भोजन पचाने के लिए हमें गुरुत्वाकर्षण की ज़रूरत नहीं होती। भोजन पचाने के लिए पेरिस्टलसिस नामक एक प्रक्रिया ज़िम्मेदार होती है, जो गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर नहीं करती। इसमें मांसपेशियों का संकुचन और शिथिलन शामिल होता है, जिससे भोजन पाचन तंत्र के अंदर नीचे की ओर धकेला जाता है। सिर ऊपर हो या नीचे, गुरुत्वाकर्षण हो या न हो, आपका शरीर भोजन को हमेशा पचाता रहेगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद लें।

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