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बच्चा पैदा होने के बाद क्यों माना जाता है घर ‘अशुद्ध’? नहीं होता पूजा-पाठ! हिंदू धर्म में सूतक परंपरा की सच्चाई जान हो जाएंग हैरान

हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार, अगर घर में बच्चा पैदा होता है, तो सूतक लग जाता है और उस घर को ‘अशुद्ध’ माना जाता है और इस दौरान पूजा पाठ या फिर कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता हैं, लेकिन ऐसा क्योंक होता हैं? बच्चा पैदा होना तो बड़ी खुशखबरी होती हैं. चलिए जानते हैं यहां हिंदू धर्म में क्या है बच्चा पैदा होने के बाद सूतक सलगने की वजह

Published by chhaya sharma

जब कोई महिला बच्चा पैदा करती है, तो वो एक नए वंश को आगे बढ़ाती है, जो खुद में एक बहुत बड़ी खुशखबरी है. घर में बच्चा होने के बाद परिवार के सभी लोग खुशी से झूम उठते हैं और जगह-जगह इस बात की खुशखबरी देते हैं और मिठाइयां बांटते हैं. लेकिन जब कोई बच्चा किसी के घर में पैदा होता है, तो कुछ दिनों तक उस घर को अशुभ माना जाता है, जिसे हिंदू धर्म में सोबड़ या सूतक लगना कहते हैं. कुछ लोग इस धर्म से जोड़ते हैं और कुछ लोग इसे पूरानी परंपरा भी बताते हैं. लकिन अगर आप भी सोचते हैं कि आखिर क्यों बच्चा पैदा होने के बाद घर को ‘अशुद्ध’ माना जाता है और क्यों सूतक यानी सोबड़ लगता है? तो चलिए जानते है यहां इसका जवाब. 

क्यों बच्चा पैदा होने के बाद घर में नहीं होती कोई पूजा पाठ? 

दरअसल, हिंदू धर्म में हर परंपरा और रीति-रिवाज को लेकर तर्क जरूर होता है. जैसे बच्चे के जन्म के बाद लगने वाला यह सोबड़ सिर्फ कोई परंपरा और रिवाज नहीं, बल्कि इसे मां और बच्चे की सेहत से जोड़ा गया है. धार्मिक दृष्टि के अनुसार जब महिला बच्चे को जन्म देती है, तो उस समय मां और बच्चा दोनों ही अशुद्ध अवस्था में होते हैं, क्योंकि जन्म देते हुए मां के शरीर से खून के साथ-साथ अन्य तत्व भी बाहर आते हैं. इसी वजह से बच्चा पैदा होने के बाद घर में 10 दिनों तक घर में पूजा-पाठ, धार्मिक कार्य या मंदिर जाने के लिए मना किया जाता है. इस अवधि को “सूतक काल” कहा जाता है. बच्चा पैदा करने के बाद मां का शरीर पूरी तरह थक जाता है, इसलिए महिला को आराम और शुद्धि की जरूरत होती है. वहीं 10 दिन पूरे होने के बाद घर में हवन कराया जाता है, ताकी शुद्धि हो सके और इसे  “सूतक शुद्धि” कहा जाता है, इस दिन से घर में धार्मिक कार्य दोबारा शुरू जाते हैं.

क्या है पूरानी परंपरा? 

पुराने समय में महिलाएं अस्पताल में नहीं बल्कि घर पर ही बच्चा पैदा करती थी और इसलिए घर पर ही मां और बच्चे के देखभाल के लिए यह नियम बनाए गए थे. सोबड़ का मकसद यह कभी नहीं था कि मां और बच्चे को “अशुद्ध” माना जाए. बल्कि मां और बच्चे की सेहत से के लिए सावधानी बरती जाए. इस दौरान मां को पौष्टिक खाना दिया जाता था. ताकी उसके शरीर में जान आए. ज्यादा काम करने से रोका जाता था और बच्चे को सिर्फ मां के संपर्क में रखा जाता था, ताकी बच्चे को भी पर्याप्त दूध और मां का प्यार मिल सके. इसके अलावा मां के आसपास शांत माहौल रखा जाता था, ताकी मां का मानसिक संतुलन ठीक रहे रहे.  

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