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Ekadashi kab ki hai: 14 या 15 मार्च, कब है पापमोचनी एकादशी? पूजा विधि और शुभ मुहूर्त भी जान लें

Ekadashi kab ki hai: एकादशी के दिन दिनभर उपवास और शाम को भगवान की आरती की जाती है. वहीं, अगले दिन द्वादशी तिथि पर पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है.

Published by JP Yadav

Ekadashi kab ki hai: प्रत्येक वर्ष 24 एकादशी पड़ती हैं यानी हर पखवाड़े में एक एकादशी. कभी-कभार दोनों एकादशी एक ही पखवाड़े में भी पड़ जाती हैं, हालांकि यह नहीं के बराबर होता है.  मार्च, 2026 में दो एकादशी (पापमोचनी एकादशी और कामदा एकादशी) पड़ेंगी.  इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे कि मार्च 2026 में दोनों महत्वपूर्ण एकादशी कब और किस तारीख को पड़ रही हैं.  यह भी बताएंगे कि दोनों एकादशी की सही तारीख और पूजा पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

कब है पापमोचनी एकादशी?

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को ही पापमोचनी एकादशी के रूप में जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि पापमोचनी एकादशी के दिन व्रत रखने और पूजा करने से श्रद्धालुओं के उन पापों का भी नाश होता है, जो उन्होंने अनजाने किए होते हैं.  इसके साथ ही जीवन में भी सुख-शांति मिलती है. 

कितने बजे से शुरू होगी पापमोचनी एकादशी

हिंदू पंचांग के मुताबिक,  रविवार (14 मार्च, 2026) को सुबह 8 बजकर 10 मिनट से पापमोचनी एकादशी की तिथि शुरुआत होगी. इसके बाद अगले दिन यानी 15 मार्च (सोमवार) को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पापमोचनी एकादशी रहेगी. वहीं, उदया तिथि के नियम के अनुसार 15 मार्च 2026 को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इस तरह इस पर पापमोचनी एकादशी दो दिन रहने वाली है. 

कब  है कामदा एकादशी

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के रूप में जाना जाएगा. सामान्य तौर पर कामदा एकादशी को हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी के रूप में माना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार, कामदा एकादशी के दिन पूरी श्रद्धा से पूजा की जाए तो भगवान श्रद्धालु के हर मनोकामना पूरी करते हैं. इसके साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी आती है.

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कब मनाई जाएगी कामदा एकादशी

वैदिक पंचांग के अनुसार, कामदा एकादशी 29 मार्च 2026 को मनाई जाएगी.  

क्या करें एकादशी के दिन?

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, दोनों ही एकादशी पर सुबह जल्दी  स्नान करें और साफ कपड़े पहनने को महत्व दें और नए हों तो क्या कहने. आमतौर पर एकादशी के दिन भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है और इस दौरान व्रत का संकल्प भी लिया जाता है. पूजा के दौरान भगवान को धूप, दीप, फूल और फल करने की परंपरा सदियों से है. मिठाई और तुलसी के पत्ते भोग चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है. ज्योतिषाचार्य सलाह देते हैं कि एकादशी पर विष्णु मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का जाप करना श्रद्धालुओं के लिए बहुत हितकारी माना जाता है.

Disclaimer: लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. https://www.inkhabar.com/ इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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