Holi 2026 kab hai: होली का त्योहार रंग और खुशियों का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ जुड़ा होलिका दहन का पर्व भी धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास महत्व रखता है. इस साल होलिका दहन 3 मार्च को मनाया जाएगा. ज्योतिषियों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ लोग इस दिन विशेष सावधानी बरतें तो ही शुभ फल मिलता है.
किन लोगों को बचना चाहिए
- बीमार और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोग: होलिका दहन के समय आग और धुएं से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है.
- गर्भवती महिलाएं: आग, धुआं और भीड़ से जोखिम बढ़ जाता है.
- वृद्ध और छोटे बच्चे: हल्के या भीड़ वाले स्थानों में सावधानी आवश्यक है.
- ग्रहण या सूतक काल वाले लोग: ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहण और सूतक काल में होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है.
धार्मिक और ज्योतिषीय कारण
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. लेकिन ज्योतिषियों का मानना है कि ग्रहण, सूतक काल या कमजोर ग्रह स्थिति में यह पर्व शुभ फल नहीं देता. धर्मग्रंथों में बताया गया है कि उचित स्थान, समय और दिशा का पालन न करने से विपरीत परिणाम हो सकते हैं. परिवार, स्वास्थ्य और धन की सुरक्षा के लिए परंपरागत उपायों का पालन जरूरी है.
पारंपरिक सावधानियां
- सुरक्षित स्थान का चुनाव: होलिका दहन खुले स्थान पर और भीड़ से दूर करें.
- आग और धुएं से सुरक्षा: बच्चों और वृद्धों को आग के पास न जाने दें.
- ध्यान और मंत्र: होलिका दहन से पहले छोटे मंत्र या प्रार्थना करना शुभ माना जाता है.
- सामग्री का चयन: केवल सुखी लकड़ियां और पारंपरिक सामग्री का उपयोग करें, प्लास्टिक या हानिकारक सामग्री न डालें.
- संपूर्ण परिवार की सुरक्षा: बच्चों और बुजुर्गों पर निगरानी रखें, होलिका दहन के दौरान सावधानी अपनाएं.

