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Bhainswa Mata Temple: भारत का अनोखा मंदिर, जहां उल्टा स्वस्तिक बनाना माना जाता है शुभ, संतान प्राप्ति के लिए है प्रसिद्ध

Bhainswa Mata Temple : राजगढ़ के भेसवा गांव में स्थित भैंसवा माता का शक्तिपीठ चमत्कारों और आस्था के लिए प्रसिद्ध है. यहां निसंतान दंपति उल्टा स्वस्तिक बनाकर संतान प्राप्ति की कामना करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर पालना अर्पित करते हैं. नवरात्र में यहां विशेष आयोजन और मेले का आयोजन होता है. 600 साल पुरानी कथा और “दूध तलाई” की मान्यता इस मंदिर को और भी खास बनाती है.

Published by Ranjana Sharma

Bhainswa Mata Temple:  मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के भेसवा गांव में स्थित भैंसवा माता का सिद्ध शक्तिपीठ सिर्फ आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि चमत्कारों के लिए भी जाना जाता है. यहां संतान प्राप्ति की कामना लेकर आने वाले दंपतियों की लंबी कतारें लगती हैं, और मान्यता है कि माता उनके जीवन को खुशियों से भर देती हैं.

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निसंतान दंपतियों के लिए आस्था का केंद्र

भैंसवा माता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां संतान की इच्छा रखने वाले दंपति उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं. कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई यह प्रार्थना जरूर पूरी होती है. मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में बच्चों के पालने अर्पित करते हैं, जिसकी वजह से परिसर में सैकड़ों पालने टंगे दिखाई देते हैं.

नवरात्र में उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब

चैत्र नवरात्र के दौरान इस शक्तिपीठ में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. इन दिनों यहां 108 कुंडीय शतचंडी यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सैकड़ों लोग जनकल्याण की भावना से शामिल हो रहे हैं. सात मंजिला यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है और पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठता है. करीब 20 साल पहले तक यह स्थान पहाड़ी पर बने एक छोटे से मंदिर तक सीमित था, लेकिन मंदिर ट्रस्ट के प्रयासों से आज यह विशाल धार्मिक स्थल बन चुका है. हर साल यहां भव्य मेला लगता है और नवरात्र में माता की पालकी भी निकाली जाती है.

यह है धार्मिक मान्यता

स्थानीय मान्यता के अनुसार, लगभग 600 वर्ष पहले लाखा नाम का एक बंजारा इस क्षेत्र में अपने मवेशी चराने आता था. एक दिन उसे जंगल में एक छोटी बच्ची मिली, जिसे उसने अपनी संतान की तरह पाला और उसका नाम बीजासन रखा. कहा जाता है कि बीजासन में दिव्य शक्तियां थीं-वह जहां “ओम” उच्चारण करती, वहां जल प्रकट हो जाता था.

दूध तलाई का रहस्य और आस्था

किंवदंती के अनुसार, एक दिन जब लाखा ने छिपकर बीजासन को देखा, तो वह उसी क्षण धरती में समा गई. जिस स्थान पर यह घटना हुई, वह आज “दूध तलाई” के नाम से प्रसिद्ध है. मान्यता है कि जिन माताओं को स्तनपान में समस्या होती है, वे यहां के जल का उपयोग करती हैं और उन्हें लाभ मिलता है. भैंसवा माता के इस धाम में आज भी दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं. चाहे संतान प्राप्ति की इच्छा हो या अन्य जीवन समस्याएं-भक्तों का विश्वास है कि माता उनके कष्ट जरूर दूर करती हैं.
Ranjana Sharma
Published by Ranjana Sharma

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